उत्तर:
- भारतीय कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो खाद्य सुरक्षा, रोजगार एवं औद्योगिक विकास का प्राथमिक आधार है।
वर्तमान प्रवृत्तियाँ:
- GDP व रोजगार: GDP में लगभग 16% योगदान तथा लगभग 46% कार्यशील जनसंख्या की निर्भरता।
- उद्योग व व्यापार: कृषि आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति तथा निर्यात में उल्लेखनीय योगदान।
- उत्पादन स्तर (कुल खाद्यान्न ~357 MMT), गेहूँ (117MMT), मक्का (43MMT), श्री अन्न (18MMT), तिलहन (43MMT) एवं दालें (25.62MMT)।
- वैश्विक स्थिति: चावल, दूध, दालें, मसाले व जूट उत्पादन में भारत विश्व में प्रथम गेहूँ, कपास, गन्ना व मूँगफली में द्वितीय स्थान।
- वृद्धि दर: पिछले 5 वर्षों में कृषि व संबद्ध क्षेत्र की औसत वृद्धि दर 4.4% रही (पशुपालन 7.1%, मत्स्य पालन 8.8%, फसल क्षेत्र 3.8%).
प्रमुख चुनौतियाँ:
- असंतुलित फसल प्रारूप: गेहूँ-चावल पर अत्यधिक निर्भरता, जबकि दलहन-तिलहन का आयात।
- मौसम निर्भरता व कम आय: मानसून पर निर्भरता; किसानों की औसत मासिक आय (लगभग ₹10,000) कम होना।
- भूमि विखंडन: 86% किसान लघु व सीमांत श्रेणी में भू-अभिलेखों में अस्पष्टता।
- गुणवत्तापूर्ण इनपुट की कमी: अप्रमाणित बीज; उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग (N:P:K अनुपात 4:2:1 के स्थान पर 11:4:1)।
- संरचनात्मक कमियाँ: सूक्ष्म सिंचाई का धीमा प्रसार, निम्न यंत्रीकरण तथा सीमित कृषि अनुसंधान व वैज्ञानिक पहुंच।
- कृषि को धारणीय और लाभदायक बनाने के लिए फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीकों (जैसे सूक्ष्म सिंचाई व यंत्रीकरण) के विस्तार, और डिजिटल एग्री-स्टैक के प्रभावी क्रियान्वयन से ही किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
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