चर्चा में क्यों?: भारत की जैव अर्थव्यवस्था ने 150 अरब डॉलर का लक्ष्य समय से 2 वर्ष पहले (2023 में) ही प्राप्त कर लिया।
2024 के अंत तक भारतीय जैव अर्थव्यवस्था का मूल्य 165.7 अरब डॉलर पहुँच गया है।
भारत के 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 94 बायोइनक्यूबेटरों का नेटवर्क स्थापित।
उद्देश्यः भारत को एक वैश्विक जैव-विनिर्माण केंद्र बनाना।
कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय महत्व के छह विषयगत क्षेत्रों की पहचान की गई है-
जैव-आधारित रसायन, बायोपोलीमर्स, सक्रिय फार्मास्युटिकल तत्व (एपीआई) और एंजाइम।
स्मार्ट प्रोटीन और कार्यात्मक खाद्य पदार्थ।
सटीक जैव-चिकित्सीय उपचार।
जलवायु-लचीली कृषि।
कार्बन कैप्चर और उपयोग।
समुद्री और अंतरिक्ष अनुसंधान शामिल हैं।
लक्ष्यः देश भर में PPP के तहत अत्याधुनिक साझा सुविधाएँ, ‘मूलांकुर बायोएनेबलर्स’ (बायो-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब, बायोफाउंड्री और बायोमैन्युफैक्चरिंग हब सहित) स्थापित करना