प्रस्तावना
- 21वीं सदी के युद्ध तेजी से बदल रहे हैं। पारंपरिक युद्धों की जगह अब ड्रोन, स्वार्म ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स और सटीक प्रहार (Precision Strike) आधारित युद्ध प्रणालियाँ ले रही हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, अजरबैजान-आर्मेनिया संघर्ष और पश्चिम एशिया के हालिया संघर्षों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भविष्य का युद्ध तकनीक-संचालित होगा।
- इसी परिप्रेक्ष्य में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी लाइटरिंग म्यूनिशन ‘नागास्त्र’ के सफल उपयोग के बाद अब भारत ‘भार्गवास्त्र ’, ह्यूमनॉइड रोबोट, स्वार्म ड्रोन और ब्रह्मोस मिसाइल के स्वदेशी बूस्टर सिस्टम के विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर और नागास्त्र की सफलता
- ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित ‘नागास्त्र’ लाइटरिंग म्यूनिशन का सफल उपयोग किया।
- नागास्त्र का विकास सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया द्वारा किया गया है।
नागास्त्र क्या है?
- नागास्त्र एक Loitering Munition (कामीकाज़े ड्रोन) है।
- यह:
- लक्ष्य क्षेत्र में कुछ समय तक मंडरा सकता है।
- लक्ष्य की पहचान कर सकता है।
- लक्ष्य पर स्वयं जाकर विस्फोट कर सकता है।
- दुश्मन के बंकर, वाहन और सैन्य प्रतिष्ठानों को नष्ट कर सकता है।
नागास्त्र की प्रमुख विशेषताएँ
नागास्त्र-1
- रेंज: लगभग 15 किमी
- उड़ान समय: लगभग 1 घंटा
- इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर
- दिन और रात दोनों में संचालन
- नागास्त्र-1A, 1B एवं अन्य संस्करण
- साक्षात्कार के अनुसार विभिन्न उन्नत संस्करणों पर कार्य जारी है।
इनका उपयोग:
- निगरानी
- लक्ष्य पहचान
- सटीक प्रहार
के लिए किया जाएगा।
विश्व में ड्रोन युद्ध का बदलता स्वरूप
- 2020 के अजरबैजान-आर्मेनिया युद्ध ने दिखाया कि:
- ड्रोन पारंपरिक टैंकों को नष्ट कर सकते हैं।
- कम लागत वाले UAV महंगे हथियारों को निष्क्रिय कर सकते हैं।
- युद्धक्षेत्र में वास्तविक समय की खुफिया जानकारी उपलब्ध करवा सकते हैं।
⇒ इसी अनुभव के आधार पर भारत ने अपने स्वदेशी ड्रोन कार्यक्रमों को गति दी।
भार्गवास्त्र : भारत की नई काउंटर-ड्रोन प्रणाली
- नागास्त्र के बाद भारत ‘भार्गवास्त्र ’ नामक काउंटर-ड्रोन प्रणाली विकसित कर रहा है।
उद्देश्य
- स्वार्म ड्रोन हमलों को विफल करना
- दुश्मन के छोटे UAV को नष्ट करना
- संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की रक्षा करना
महत्व
हाल के वर्षों में:
- रूस-यूक्रेन युद्ध
- इज़राइल-हमास संघर्ष
- लाल सागर क्षेत्र की घटनाएँ
ने दिखाया है कि स्वार्म ड्रोन भविष्य की बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
स्वार्म ड्रोन: युद्ध की नई क्रांति
- समूह में कार्य करते हैं
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हैं
- एक-दूसरे से संवाद करते हैं
- सामूहिक रूप से लक्ष्य पर हमला करते हैं
लाभ
- कम लागत
- अधिक प्रभाव
- एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव
- कई लक्ष्यों पर एक साथ हमला
⇒ भारत वर्तमान में अत्याधुनिक स्वार्म ड्रोन तकनीक पर कार्य कर रहा है।
ह्यूमनॉइड रोबोट: भविष्य का सैनिक
- साक्षात्कार में बताया गया कि भविष्य में ह्यूमनॉइड रोबोट भी तैनात किए जा सकते हैं।
संभावित कार्य
- जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में संचालन
- बम निष्क्रिय करना
- निगरानी
- लॉजिस्टिक सहायता
- युद्धक्षेत्र में सैनिकों का समर्थन
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
- अमेरिका, चीन और रूस पहले से सैन्य रोबोटिक्स पर भारी निवेश कर रहे हैं।
- भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
ब्रह्मोस मिसाइल का स्वदेशी बूस्टर सिस्टम
- भारत अब ब्रह्मोस मिसाइल के लिए स्वदेशी बूस्टर सिस्टम विकसित कर रहा है।
महत्व
- आयात निर्भरता में कमी
- लागत में कमी
- तकनीकी आत्मनिर्भरता
- निर्यात क्षमता में वृद्धि
⇒ यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की रक्षा नीति का महत्वपूर्ण भाग है।
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता: हाल की उपलब्धियाँ
- मिसाइल क्षेत्र
- अग्नि-5 MIRV परीक्षण (मिशन दिव्यास्त्र)
- प्रलय मिसाइल
- ब्रह्मोस
- आकाश-NG
- अस्त्र मिसाइल
- ड्रोन क्षेत्र
- नागास्त्र
- रुस्तम UAV
- TAPAS-BH
- Archer-NG
- वायु रक्षा
- आकाश प्रणाली
- QRSAM
- MR-SAM
- XRSAM (विकासाधीन)
भारत के रक्षा निर्यात में वृद्धि
भारत का रक्षा निर्यात:
- 2014-15 में लगभग ₹1,940 करोड़
- 2024-25 में ₹23,000 करोड़ से अधिक
तक पहुँच चुका है।
⇒ सरकार ने 2029 तक ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।
भारत के सामने चुनौतियाँ
1. उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक
- अधिकांश सैन्य प्रणालियाँ अत्याधुनिक चिप्स पर आधारित हैं।
2. AI आधारित युद्ध
- भविष्य के युद्धों में AI निर्णायक भूमिका निभाएगा।
3. साइबर सुरक्षा
- सैन्य नेटवर्कों को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना आवश्यक होगा।
4. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
- दुश्मन के संचार और सेंसर प्रणालियों को बाधित करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
UPSC / RAS परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
तथ्य :-
- नागास्त्र = स्वदेशी Loitering Munition
- भार्गवास्त्र = काउंटर-ड्रोन प्रणाली
- मिशन दिव्यास्त्र = अग्नि-5 MIRV परीक्षण
- ब्रह्मोस = भारत-रूस संयुक्त सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल
- स्वार्म ड्रोन = AI आधारित समूह ड्रोन प्रणाली
- ह्यूमनॉइड रोबोट = भविष्य की सैन्य तकनीक
निष्कर्ष
- भारत की रक्षा नीति अब केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रही है। देश स्वदेशी अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, रोबोटिक्स, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। नागास्त्र, भागवास्त्र, ह्यूमनॉइड रोबोट और ब्रह्मोस के स्वदेशी बूस्टर सिस्टम जैसी परियोजनाएँ इस परिवर्तन की प्रतीक हैं।
- यदि यह गति बनी रहती है, तो भारत आने वाले दशक में विश्व की अग्रणी रक्षा प्रौद्योगिकी शक्तियों में शामिल हो सकता है तथा आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र बन सकता है।
