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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सैटेलाइट-टैग वाले दो अमूर फाल्कन (बाज) ने भारत के रास्ते दक्षिणी अफ्रीका से सुदूर-पूर्व एशिया की ओर अपनी वापसी की यात्रा (प्रवास) शुरू कर दी है।
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समुदाय-नेतृत्व वाली संरक्षण पहल के अंतर्गत नवंबर, 2025 में मणिपुर के तागलोंग जिले के चियुलुआन में इन पक्षियों पर सैटेलाइट टैग लगाए गए थे।
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यह एक छोटा प्रवासी शिकारी पक्षी है, जो अपनी लगभग 22,000 किमी की लंबी वार्षिक प्रवास यात्रा के लिए विश्व प्रसिद्ध है
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वैज्ञानिक नाम: Falco amurensis
- नामकरण: इस पक्षी का नाम रूस-चीन सीमा क्षेत्र की अमूर नदी के नाम पर रखा गया है, जो इसका मुख्य प्रजनन स्थल है।
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IUCN स्थिति: रेड लिस्ट में "सबसे कम चिंताजनक" (Least Concern) श्रेणी।
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत उच्चतम संरक्षण प्राप्त।
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भारत में यह मुख्यतः पूर्वोत्तर राज्यों नागालैंड, मणिपुर असम में देखा जाता है