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भारत के पहले सैटेलाइट-टैग्ड गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ

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  • असम के 1,302 वर्ग किलोमीटर में फैले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में भारत के पहले सैटेलाइट-टैग्ड (उपग्रह द्वारा ट्रैक किए जाने वाले) गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ (Ganges Soft-shell Turtle) को छोड़ा गया है।

  • इसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान प्राधिकरण और असम वन विभाग के सहयोग से संचालित किया गया।

  • वित्तीय सहायता:  नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी (National Geographic Society) द्वारा । 

गंगा सॉफ्ट-शेल कछुआ

  • वैज्ञानिक नाम: Nilssonia gangetica।

  • प्राकृतिक आवास: यह मुख्य रूप से बड़ी नदियों, झीलों और जलाशयों में निवास करता है।

    • मुख्य रूप से गंगा, ब्रह्मपुत्र, महानदी और सिंधु नदी प्रणालियों में पाया जाता है।

  • शारीरिक पहचान: इसके सिर के ऊपरी भाग पर मौजूद विशिष्ट 'तीर के आकार' (Arrowhead-shaped) के निशानों के आधार पर अलग पहचाना जा सकता है।

  • संरक्षण

    • IUCN रेड लिस्ट: संकटग्रस्त (Endangered)

    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (WPA, 1972): अनुसूची-I (सर्वोच्च विधिक संरक्षण)

    • CITES: परिशिष्ट-1

  • पारिस्थितिक भूमिका : यह नदी पारिस्थितिकी तंत्र का एक प्रमुख शिकारी (Predator) है। 

    • यह मृत और सड़ रहे जीवों के अवशेषों को खाकर नदी के जल और तंत्र को स्वच्छ रखने में एक महत्वपूर्ण सफाईकर्मी (Scavenger) की भूमिका निभाता है।

  • भारत में सॉफ्ट-शेल (नरम कवच वाले) कछुओं की कुल 8 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अकेले 5 प्रजातियां काजीरंगा के पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद हैं।