भारत का तेजी से बढ़ता निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र
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स्टार्टअप्स की संख्या में भारी उछाल: भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, जहाँ स्टार्टअप्स की संख्या वर्ष 2019 में एकल अंक से बढ़कर वर्ष 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई है।
निजी क्षेत्र का निवेश: पिछले पांच वर्षों में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश बढ़कर 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है।
अकादमिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण: छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए पहले चरण में सात विशेष प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी।
कुशल कार्यबल का विकास: अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं, जिसके तहत उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 प्रतिभागियों को प्रमाणित किया जा चुका है।
वैश्विक भागीदारी का विस्तार: अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक साझेदारी लगातार गहरी हो रही है, जिसका दायरा अब 45 से अधिक देशों तक फैल चुका है। स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता और फंड :
1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड: विकास के चरण में पहुंच चुके अंतरिक्ष स्टार्टअप्स को बड़े पैमाने पर सहयोग देने के लिए SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है।
500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड: यह फंड शुरुआती चरण के नए विचारों को व्यावसायिक रूप से बाजार में बिकने योग्य उत्पादों में बदलने में मदद कर रहा है।
सीड फंड योजना (Seed Fund Scheme): विचार (Idea) और प्रोटोटाइप चरण के शुरुआती स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का वित्तीय अनुदान, मार्गदर्शन (Mentorship) और इकोसिस्टम सहायता प्रदान की जा रही है।