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वर्तमान स्थापित क्षमता: 8.78 GW है, जो कुल बिजली उत्पादन का लगभग 3% (2024-25 में 3.1%) है।

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लक्ष्य एवं विस्तार: 700 MW (स्वदेशी) और 1000 MW (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग) रिएक्टरों के माध्यम से 2031-32 तक 22.38 GW क्षमता स्थापित करना।
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भविष्य की क्षमता (NPCIL): एनपीसीआईएल ने वर्ष 2032 के पश्चात 32 GW की अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिसमें स्वदेशी प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) और लाइट वॉटर रिएक्टर (LWR ) शामिल होंगे।
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विदेशी सहयोग: अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से वर्ष 2047 तक कुल परमाणु क्षमता लगभग 54 GW तक पहुँचने का अनुमान है।
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विविध भागीदारी: शेष 46 GW क्षमता का विकास अन्य सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र और संयुक्त उद्यमों द्वारा विभिन्न रिएक्टर प्रौद्योगिकियों और व्यावसायिक मॉडलों के माध्यम से किया जाएगा।
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न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड( NPCIL): परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) है।
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स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR): कल्पक्कम स्थित स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने 6 अप्रैल 2026 को अपनी प्रथम क्रिटिकैलिटी प्राप्त की।
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परमाणु ऊर्जा मिशन:
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केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित इस मिशन के अंतर्गत लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के डिजाइन, विकास और तैनाती को बढ़ावा देने के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
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लक्ष्य: मिशन के तहत वर्ष 2033 तक कम से कम पाँच स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए SMR चालू करने की योजना है।
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दीर्घकालिक लक्ष्य: 2047 तक 100 GW का लक्ष्य हासिल करना।
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भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की पहल:
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200 मेगावाट क्षमता का भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200)।
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55 मेगावाट (MWe) क्षमता वाला लघु मॉड्यूलर रिएक्टर SMR-55.
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हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 5 मेगावाट तापीय (MWth) तक का उच्च तापमान गैस-शीतल रिएक्टर (HTGCR)
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अधिनियमन: भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा को कई ऐतिहासिक कानूनों द्वारा निर्देशित किया गया है
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परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962
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परमाणु ऊर्जा की क्षति हेतु असैनिक दायित्व अधिनियम, 2010
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भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (The Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India - SHANTI) अधिनियम , 2025
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उद्देश्य: यह विधेयक भारत के परमाणु ऊर्जा संबंधी कानूनी ढांचे को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाता है।
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यह विधेयक 1962 के पुराने 'परमाणु ऊर्जा अधिनियम' और 2010 के 'परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधि नियम' (CLND) की जगह लेगा।
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निजी भागीदारी: यह नियामकीय निगरानी के अंतर्गत परमाणु क्षेत्र में सीमित निजी भागीदारी को सक्षम बनाता है।
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नियामकीय सुदृढ़ीकरण: यह परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक मान्यता प्रदान कर वैधानिक विनियमन को और अधिक मजबूत करता है।
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स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य: यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और वर्ष 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के दीर्घकालिक लक्ष्य का समर्थन करता है।
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- वैश्विक सहयोग: भारत ने अब तक 18 देशों के साथ नागरिक परमाणु सहयोग पर 18 देशों के साथ अंतर-सरकारी समझौतों (IGAs) पर हस्ताक्षर किए हैं।