- पूरा नाम: प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन)
- प्रकृति: PMO के तहत ICT-आधारित, बहु-माध्यम, बहु-उद्देश्यीय मंच
- डिज़ाइन किया गया: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) + राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा
- उद्देश्य: आम आदमी की शिकायतों का समाधान करना + केंद्र/राज्य सरकार की परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा करना
- हिस्सा: डिजिटल इंडिया पहल का; साथ ही एक सुशासन मॉडल भी
प्रौद्योगिकी
तीन मुख्य प्रौद्योगिकियां
- डिजिटल डेटा प्रबंधन
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
- भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (Geo-spatial technology)
प्रगति की विशेषताएं
- PRAGATI दिवस: हर महीने का चौथा बुधवार — PM बैठक की अध्यक्षता करते हैं
- चिह्नित किए गए मुद्दे हर तीसरे बुधवार (बैठक से 7 दिन पहले) अपलोड किए जाते हैं
- मुद्दे लिए जाते हैं: CPGRAMS (सार्वजनिक शिकायतें), चल रहे कार्यक्रमों, लंबित परियोजनाओं से
- CPGRAMS: केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली — 24×7 नागरिक पोर्टल, जो सभी मंत्रालयों/राज्यों से जुड़ा है
मुख्य उद्देश्य
- महत्वपूर्ण केंद्र और राज्य कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा करना
- अंतर-विभागीय और केंद्र-राज्य समन्वय में मौजूद कमियों को दूर करना
- वास्तविक समय की सूचना के आदान-प्रदान के माध्यम से ई-पारदर्शिता और ई-जवाबदेही लाना
- केंद्र और राज्यों को एक मंच पर लाकर सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना
- नागरिकों की शिकायतों का समाधान करना और परियोजना वितरण में 'अंतिम-मील' (last-mile) की खाई को पाटना
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लागत में वृद्धि और समय की देरी को कम करना
प्रगति पोर्टल के लाभ
- सुशासन: ई-पारदर्शिता, जवाबदेही, नागरिक-केंद्रित प्रशासन — ARC की सिफारिशें
- सहकारी संघवाद: केंद्र + राज्य एक ही मंच पर; PM सीधे तौर पर मुख्य सचिवों से बातचीत करते हैं।
- ई-गवर्नेंस फ्रेमवर्क: डिजिटल इंडिया, UMANG, CPGRAMS, PM गति शक्ति, PARIVESH से जुड़ाव।
- बुनियादी ढांचा प्रशासन: ज़मीन अधिग्रहण में देरी, मंत्रालयों के बीच तालमेल, पर्यावरण मंज़ूरियाँ — इन सभी मुद्दों को सुलझाया गया है।
- मध्य-आय का जाल (Middle-income trap): ऑक्सफ़ोर्ड के एक अध्ययन में PRAGATI को बुनियादी ढांचे के नेतृत्व वाली विकास प्रक्रिया के ज़रिए इस जाल से बाहर निकलने का एक साधन बताया गया है।