- “ राजस्थान में कैराकल संरक्षण ” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला –
- “ प्रोजेक्ट कैराकल ”- शुभारंभ : 15 अप्रैल, 2026
- स्थान : रणथम्भौर टाइगर रिजर्व, सवाई माधोपुर
- आयोजक : राजस्थान वन विभाग द्वारा
- सहयोगी संस्थाएं : भारतीय वन्यजीव संस्थान, (देहरादून, उत्तराखण्ड), SACON ( सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री, कोयंबटूर, तमिलनाडू ), टाइगर वॉच संस्था
- प्रोजेक्ट की विशेषज्ञ टीम-
- प्रधान अन्वेषक : डॉ. शोमिता मुखर्जी
- सह-प्रधान अन्वेषक : डॉ. अयान साधु और डॉ. धर्मेंद्र खंडाल
- राजस्थान में सियाहगोश (कैराकल ) के संरक्षण के लिए तैयार किया गया। देश का प्रथम ' नेशनल मास्टरप्लान ' ( भारत का पहला राष्ट्रीय रोडमैप )

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- मैपिंग और डेटा : SACON, देशभर में इनके ठिकानों की मैपिंग करेगा।
- रेडियो कॉलरिंग : सीमावर्ती इलाकों में इनकी मौजूदगी का पता लगाने के लिए
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वैश्विक IUCN रेड लिस्ट-कम चिंताजनक
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (भारत), 1972 : अनुसूची-I
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CITES : एशियाई आबादी को परिशिष्ट-I में रखा गया है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध।
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प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम : भारत सरकार ने 2021 में इसे 22 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में शामिल किया।
- राजस्थान को दो बड़े संरक्षण क्षेत्रों में विभाजित किया गया-
1. थार मरुस्थल (बाड़मेर, जैसलमेर, कच्छ का रण)
2. रणथम्भौर, धौलपुर, करौली, मुकुन्दरा हिल्स क्षेत्र