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प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर)

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  • स्थानः कलपक्कम (तमिलनाडु) 
  • चर्चा में क्यों? भारत का पहला स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल, 2026 को सफलतापूर्वक प्रथम क्रिटिकैलिटी (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत) प्राप्त कर ली है। 
  • क्रिटिकैलिटी अवस्थाः वह अवस्था है जब कोई परमाणु रिएक्टर स्व-संचालित श्रृंखला अभिक्रिया प्राप्त कर लेता है। यह पूर्ण विद्युत उत्पादन से पहले का महत्वपूर्ण चरण होता है
  • प्रौद्योगिकी का विकास और डिजाइनः स्वदेशी रूप से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा 
  • निर्माण और संचालनः भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (भविनी) द्वारा 
  • क्षमताः 500 Mw 
  •  विशेषताएंः
    1. PFBR का कोर यूरेनियम-238 की परत से घिरा होता है।
    2. ईंधनः पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों के विपरीत, PFBR यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का उपयोग करता है।
    3. शीतलकः तरल सोडियम को शीतलक (कूलेंट) के रूप में उपयोग करता है
    4. न्यूट्रॉनः तीव्र न्यूट्रॉन उपजाऊ यूरेनियम-238 को विखंडनीय प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करते हैं, जिससे रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन का उत्पादन कर पाता है। रिएक्टर को अंततः परत में मौजूद थोरियम-232 का उपयोग करने के लिए डिजाइन किया गया है। 
    5. रूपांतरण के माध्यम से थोरियम-232 यूरेनियम-233 में परिवर्तित हो जाएगा, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीसरे चरण के लिए ईंधन का काम करेगा।
    6. यह पूरी प्रक्रिया "क्लोज्ड फ्यूल साइकिल" पर आधारित है, जिसमें इस्तेमाल किए गए ईंधन को दोबारा उपयोग किया जाता है।
  • इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा (रूस के बाद), जो फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का व्यावसायिक संचालन करेगा।
  • भारत की तीन-चरणीय परमाणु योजना इस प्रकार हैः
    • पहले चरण में यूरेनियम से बिजली उत्पादन और प्लूटोनियम तैयार किया जाता है
    • दूसरे चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के जरिए ज्यादा ईंधन बनाया जाता है
    • तीसरे चरण में थोरियम से दीर्घकालीन ऊर्जा उत्पादन किया जाएगा
  • वर्तमान में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमताः 8.78 गीगावाट
  • 2024-25 में बिजली का उत्पादनः 56,681 मिलियन यूनिट 
  • आगामीः वर्षों में इसे बढ़ाकर 22.38 गीगावाट तक ले जाने की योजना है।