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Q.) गुरु नानक देव का भक्ति आंदोलन में योगदान। (5 Marks)

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उत्तर :-
  • गुरु नानक देव ने मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन को व्यापक और गहन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जैसे- 
  1. एकेश्वरवाद निर्गुण भक्ति परंपरा पर बल-
    -एक ईश्वर में विश्वास का उपदेश देकर उसे निर्गुण, निराकार और निर्विशेष बताया।

  2.  कर्मकांड और रूढ़िवादिता का विरोध-
    -धार्मिक अनुष्ठानों, मूर्ति पूजा, अंधविश्वास और अवतारवाद के विरोध सहित ब्राह्मणवादी और इस्लामी दोनों की रूढ़िवादिता की आलोचना की।

  3. सामाजिक समानता-
    -जाति, वर्ण व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं को अस्वीकार कर मानव  समानता पर बल दिया। जैसे- लंगर (सामुदायिक रसोई) की शुरुआत की, जो समानता और सामूहिकता का प्रतीक थी।

  4. सार्वभौमिकता और धार्मिक समन्वय-
    -उनके संदेश “सच्चे हिन्दू या सच्चे मुसलमान बनो” जैसी नैतिक शिक्षा ने धार्मिक एकता पर जोर दिया।

  5. स्थानीय भाषा का प्रयोग-
    -पंजाबी जैसी सरल भाषाओं में उपदेश दिए, जिससे आम लोगों तक आध्यात्मिक विचार आसानी से पहुँचे।

  6. व्यापक यात्राएँ-
    -उन्होंने मक्का, मदीना और बगदाद जैसे धार्मिक स्थानों की यात्राएँ की और भक्ति, समानता तथा एकता का संदेश फैलायाl 

  7. सिख धर्म की स्थापना-
    -उनकी शिक्षाओं ने सिख धर्म की नींव रखी, जिसने भक्ति आंदोलन के अनेक आदर्शों को संस्थागत रूप दिया।
निष्कर्षत: गुरु नानक देव ने न केवल भक्ति आंदोलन को समृद्ध किया, बल्कि उसे अधिक सार्वभौमिक, समानतावादी और व्यावहारिक स्वरूप प्रदान किया।