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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निदेशक मंडल (गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2,86,588.46 करोड़ रुपये (लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड अधिशेष (Surplus/लाभांश) हस्तांतरित करने को मंजूरी दी है।
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यह केंद्रीय बैंक द्वारा सरकार को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक लाभांश है।
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यह लाभांश पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में दिए गए 2.68 लाख करोड़ रुपये से लगभग 7% अधिक है।
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बजटीय लक्ष्य: वित्त मंत्री ने 2026-27 के बजट में RBI, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और अन्य वित्तीय संस्थानों से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये के लाभांश का लक्ष्य रखा था
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RBI अधिनियम, 1934 की धारा 47, बिमल जालान समिति की सिफारिशों के आधार पर आवश्यक आकस्मिक जोखिम बफर (CRB) को बनाए रखने के बाद ही शेष बचा हुआ अधिशेष (Surplus) केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाता है।
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आकस्मिक जोखिम बफर (CRB)
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यह RBI की बैलेंस शीट (आर्थिक पूंजी) का एक निश्चित प्रतिशत होता है, जिसे मौद्रिक और वित्तीय स्थिरता के लिए आपातकालीन/अप्रत्याशित जोखिमों से निपटने के लिए एक 'फंड' के रूप में सुरक्षित रखा जाता है।
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वर्तमान स्थिति: RBI बोर्ड ने इस बार CRB के लिए 1.09 लाख करोड़ रुपये अलग रखे हैं।
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RBI अधिशेष के स्त्रोत : विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन, सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) पर ब्याज, और तरलता समायोजन सुविधा (LAF) के तहत बैंकों को दिए गए ऋण पर अर्जित ब्याज ।
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बिमल जालान समिति (2019)
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RBI के आर्थिक पूंजी ढांचे (Economic Capital Framework - ECF) की समीक्षा के लिए गठित की गई थी
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इसकी सिफारिशों से तय किया कि RBI को कितना अधिशेष सरकार को देना चाहिए और कितना जोखिम बफर (CRB) के रूप में रखना चाहिए।