चर्चा में क्यों?
- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ के बंथरा स्थित महर्षि पाराशर बायोरिसोर्स सेंटर (MPBC) में CSIR-NBRI द्वारा विकसित अपनी तरह के पहले ‘इको-एजुकेशनल हब’—‘प्रकृति ज्ञान धाम’ को राष्ट्र को समर्पित किया।
- इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण, वनस्पति विरासत और सामाजिक सहभागिता को एक मंच पर लाना है।
‘प्रकृति ज्ञान धाम’ क्या है?
- ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ को भारत की समृद्ध वनस्पति एवं सांस्कृतिक विरासत के जीवंत संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है।
- यह विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, प्रकृति प्रेमियों तथा आम नागरिकों को अनुभवात्मक एवं संवादात्मक तरीके से प्रकृति और पर्यावरण को समझने का अवसर प्रदान करता है।
इसका प्रमुख उद्देश्य है—
- वैज्ञानिक ज्ञान → जनभागीदारी → संरक्षण → आजीविका एवं सामाजिक उपयोगिता
प्रमुख घटक
1. पावन पथ
- पावन पथ (Plants and Associated Vegetations for Appreciating Nature) इस हब का प्रमुख अनुभवात्मक घटक है।
- यह प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत स्थलों और पर्यटन सुविधाओं का क्षेत्रीय नेटवर्क है, जिसमें विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों तथा उनसे संबंधित वनस्पतियों को प्रदर्शित किया गया है।
2. भारतीय विरासत उद्यान
- इस उद्यान में भारत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले स्थानों से जुड़े विरासत वृक्षों को संरक्षित किया गया है।
- प्रमुख उदाहरण—
- फतेहपुर का बावन इमली वृक्ष—52 स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जुड़ा।
- लखनऊ का मदर दशहरी आम वृक्ष।
- प्रयागराज का पातालपुरी बरगद।
- चंपारण के भितिहरवा में महात्मा गांधी द्वारा लगाए गए आम के वृक्ष के वंशज।
- गुजरात के ऐतिहासिक दांडी मार्च मार्ग से जुड़े वृक्षों के वंशज।
⇒ इन वृक्षों पर QR कोड आधारित ऑडियो सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे आगंतुक अपने स्मार्टफोन के माध्यम से उनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं वनस्पति महत्व की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
3. विभव एन्क्लेव
- विभव एन्क्लेव भारत के दुर्लभ, लुप्तप्राय एवं संकटग्रस्त पौधों के संरक्षण को समर्पित है।
- इसके माध्यम से—
- जैव विविधता ह्रास
- आवास विनाश
- जलवायु परिवर्तन
- पौधों के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
4. भैरव एन्क्लेव
- यह भारत के राज्य पौधों को प्रदर्शित करने वाला उद्यान है।
- इसमें राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित राज्य पौधों को प्रदर्शित किया गया है तथा उनके पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व को बताया गया है।
5. बैंबूस्टीयम
- बैंबूस्टीयम में 43 देशी एवं विदेशी बांस प्रजातियों को संरक्षित किया गया है।
- बांस को एक महत्वपूर्ण नवीकरणीय जैव-संसाधन के रूप में प्रदर्शित किया गया है, जिसका उपयोग—
- पारिस्थितिक पुनर्स्थापना
- कार्बन अवशोषण
- मृदा संरक्षण
- सतत आजीविका
- पारंपरिक शिल्प
- हरित अवसंरचना में किया जा सकता है।
विज्ञान से समाज तक प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण
- कार्यक्रम में CSIR-NBRI द्वारा विकसित कई प्रौद्योगिकियों को उद्योग एवं सामाजिक संस्थाओं तक पहुंचाया गया।
- महिलाओं के उद्यमिता एवं आजीविका के लिए केरल के कुडुंबश्री राज्य गरीबी उन्मूलन मिशन को चार पौध-आधारित प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की गईं—
- हर्बल एंटी-डैंड्रफ हेयर केयर ऑयल
- फ्रोटस—कमल से प्रेरित परफ्यूम
- फ्रोटस—रुद्र परफ्यूम
- हर्बल नैनो सीरम
⇒ इनका उद्देश्य विज्ञान आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के माध्यम से महिला उद्यमिता एवं आजीविका के अवसर बढ़ाना है।
उद्योग के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- CSIR-NBRI ने कम लागत वाले फोटोबायोरिए का उदाहरण है।
स्वास्थ्य क्षेत्र
- हिमालया के सहयोग से विकसित पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य के लिए हर्बल फॉर्मूलेशन का भी शुभारंभ किया गया।
संस्थागत पृष्ठभूमि
- CSIR-NBRI (राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान) पौध विज्ञान, वनस्पति विविधता, संरक्षण एवं प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान है।
- यह पहल वैज्ञानिक अनुसंधान को जैव विविधता संरक्षण, जन-जागरूकता, उद्योग, किसान एवं आजीविका से जोड़ने का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
पहल का महत्व
- ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ केवल वनस्पति उद्यान नहीं है, बल्कि इसे विज्ञान संचार और अनुभवात्मक पर्यावरण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
- इसके माध्यम से वनस्पति विविधता, जैव विविधता संरक्षण ,सांस्कृतिक विरासत, विज्ञान संचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आजीविकाको एकीकृत किया गया है।
- यह पहल भारत में ‘लैब से लैंड और लैब से समाज’ की अवधारणा को मजबूत करती है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
बिंदु तथ्य
- इको-एजुकेशनल हब का नाम: प्रकृति ज्ञान धाम
- स्थान: MPBC, बंथरा, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
- विकसित करने वाला संस्थान: CSIR-NBRI
- उद्घाटन/समर्पण: डॉ. जितेंद्र सिंह
- प्रमुख उद्देश्य: विज्ञान, पर्यावरण शिक्षा एवं जैव विविधता संरक्षण को समाज से जोड़ना
- प्रमुख पथ: पावन पथ
- संकटग्रस्त पौधों का उद्यान: विभव एन्क्लेव
- राज्य पौधों का उद्यान: भैरव एन्क्लेव
- बांस प्रजातियां: 43
- विरासत वृक्ष: भारतीय विरासत उद्यान में संरक्षित
- डिजिटल सुविधा: QR-कोड आधारित ऑडियो सिस्टम
- महिला आजीविका पहल: कुडुंबश्री को 4 पौध-आधारित तकनीकें
- उद्योग को हस्तांतरित तकनीक: कम लागत वाला फोटोबायोरिएक्टर
RAS मुख्य परीक्षा हेतु संभावित प्रश्न
प्रश्न: ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ जैसी पहलें वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज, पर्यावरण संरक्षण एवं आजीविका से जोड़ने में किस प्रकार सहायक हो सकती हैं? विवेचना कीजिए।