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प्रश्न: दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs) क्या हैं और इनकी मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? विषैले रसायनों तथा इनके निवारण हेतु किए गए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की विवेचना कीजिए। (10 अंक/150 शब्द) (UPSC/RAS)

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उत्तर:

  • ​दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs - Persistent Organic Pollutants) ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो पर्यावरण में लंबे समय तक विघटित नहीं होते, जीव-संचरण के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में जमा होते हुए और मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

​POPs की मुख्य विशेषताएँ

​अजैव निम्नीकरणीय (Non-biodegradable):

  • ​यह सहसा विगलित (biodegradable) नहीं होते हैं।  ​यानी सरल पदार्थों में विघटित या अपघटित नहीं हो पाते हैं। प्राकृतिक प्रक्रियाओं, प्रकाश-अपघटन या सूक्ष्मजीवों द्वारा इनका अपघटन संभव नहीं हो पाता, जिससे ये पर्यावरण में दशकों तक बने रहते हैं।

​वसा में घुलनशील (Fat-soluble / Lipophilic):

  • ​यह पदार्थ जल में नहीं घुलकर जीवों के वसा में आसानी से घुल जाता है तथा लंबे समय तक शरीर में रहकर नुकसान पहुँचाते हैं।  ​वसा ऊतकों (Fatty tissues) में संचित रहने के कारण जीवों के शरीर से इनका प्राकृतिक रूप से बाहर निकलना अत्यंत कठिन होता है।

​जैविक रूप से सक्रिय (Biologically Active):

  • ​ये रसायन पर्यावरण और जीवित जीवों के संपर्क में आते ही सक्रिय होकर नुकसान पहुँचाना शुरू कर देते हैं।  
    • ​इसके मुख्य उदाहरण - डीडीटी (DDT), कीटनाशी, अपमार्जक, मिथाइल मरकरी, औद्योगिक रसायन आदि शामिल हैं।  ​खाद्य श्रृंखला के उच्च पोषण स्तरों में इनकी सांद्रता निरंतर कई गुना बढ़ती जाती है (जैव-आवर्धन / Biomagnification), जिससे तंत्रिका तंत्र, प्रतिरक्षा प्रणाली और प्रजनन क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचता है तथा यह कैंसर का प्रमुख कारण बनता है।
    • दूरस्थ संचरण (Long-Range Environmental Transport): ​अपनी अर्ध-वाष्पशील प्रकृति के कारण ये वायु तथा जल धाराओं के साथ हज़ारों किलोमीटर दूर (Grasshopper Effect के माध्यम से) ऐसे सुदूर क्षेत्रों में भी पहुँच जाते हैं जहाँ इनका कभी उत्पादन या उपयोग नहीं किया गया (उदा. आर्कटिक व अंटार्कटिक क्षेत्र)।  

​POPs व विषैले रसायनों के निवारण हेतु किए गए अंतर्राष्ट्रीय प्रयास (अभिसमय)

​1. बेसल अभिसमय (Basel Convention):

  • ​यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो एक देश से दूसरे देश में अपशिष्ट पदार्थों के परिवहन को विनियमित करने हेतु किया गया है।  
  • ​विकसित देशों से विकासशील देशों में अपशिष्ट पदार्थों को भेजने से पहले ‘पूर्व सूचना सहमति प्रक्रिया’ (PIC - Prior Informed Consent) का पालन किया जाता है।  
  • ​मुख्यालय: जिनेवा (Geneva)।
  • ​इसे 1992 में लागू किया गया।
  • ​विशेष नोट: इस अभिसमय में "नाभिकीय कचरा" शामिल नहीं है।  

​2. रॉटरडैम अभिसमय (Rotterdam Convention):

  • ​यह समझौता खतरनाक रसायनों व पीडकनाशकों (Pesticides) का उपयोग पर्यावरण को हानि ना पहुँचे, इस प्रकार विनियमित करता है कि मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की क्षति ना पहुँचे।  
  • ​इसमें भी PIC (Prior Informed Consent) के प्रावधान हैं।  
  • ​इस समझौते के तहत 52 विषैले रसायनों का व्यापार PIC तालिका के तहत लाया गया था।  
  • ​भारत 2005 में इस समझौते का अनुमोदन किया।  
  • ​मुख्यालय: जिनेवा (स्विट्जरलैंड) व रोम (इटली)।  
  • ​इसके तहत निर्यात करने वाले देश द्वारा इस समझौते के बारे में संपूर्ण जानकारी आयातक देशों को उपलब्ध करवाई जाएगी।  

​3. स्टॉकहोम अभिसमय (Stockholm Convention):

  • ​यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो POPs के उत्पादन तथा उपयोग को नियंत्रित करने हेतु किया गया।  
  • ​इसके तहत 12 POPs (डर्टी दर्जन / Dirty Dozen) के उपयोग तथा उत्पादन को बंद किया गया।  
  • ​भारत ने 2006 में अनुमोदन किया।  
  • ​मुख्यालय: जिनेवा।  
  • ​यह कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) वैश्विक संधि है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण से POPs के उत्सर्जन को पूरी तरह समाप्त या न्यूनतम करना है।  

​4. मिनामाता अभिसमय (Minamata Convention):

  • ​पारे (Mercury) पर कानूनी रूप से बाध्यकारी एक वैश्विक संधि।  
  • ​उद्देश्य: मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे के हानिकारक प्रभावों से बचाना।   
  • ​पक्षकार: 150+ देश।  
  • ​सचिवालय: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)।  
  • ​भारत 2018 में सम्मिलित हुआ।  
  • ​इसके तहत पारे के प्राथमिक खनन, पारे वाले उत्पादों (जैसे थर्मामीटर, बैटरियां), दंत-अमलगम तथा औद्योगिक उत्सर्जन पर चरणबद्ध रोक लगाने का प्रावधान है।  

​सम्मेलन व प्रशासनिक व्यवस्था (COP):

  • ​इन अभिसमयों की बैठक हर 2 वर्ष में की जाती है, जिसे कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ (CoP - Conference of Parties) कहा जाता है।  
  • ​उपर्युक्त सम्मेलनों के तहत विश्व में हो रहे अवैध अपशिष्ट के व्यापार व मरकरी (पारे) के प्रयोग को बंद/नियंत्रित किया गया है।  

​⇒ वर्तमान में रासायनिक प्रदूषण से निपटने के लिए बेसल, रॉटरडैम और स्टॉकहोम तीनों सम्मेलनों की संयुक्त बैठकें (BRS Conventions) आयोजित की जाती हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर खतरनाक रसायनों के जीवन-चक्र (Life Cycle) का सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।