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प्रश्न: मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र का संक्षिप्त परिचय देते हुए पीयूष ग्रंथि की संरचना, हार्मोन, कार्य तथा हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में इसकी भूमिका का वर्णन कीजिए। (250 शब्द) (UPSC/RAS)

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उत्तर:

अंतःस्रावी तंत्र

  • अंतःस्रावी तंत्र नलिकाविहीन ग्रंथियों का एक तंत्र है, जो हार्मोन को सीधे रक्त में छोड़ता है। यह तंत्रिका तंत्र के साथ मिलकर शरीर की वृद्धि, चयापचय, प्रजनन, जल संतुलन तथा शरीर के आंतरिक संतुलन को नियंत्रित करता है। पीयूष, थायरॉइड, पैराथायरॉइड, अधिवृक्क, अग्न्याशय, पीनियल, थाइमस तथा जनन ग्रंथियाँ इसकी प्रमुख ग्रंथियाँ हैं।

पीयूष ग्रंथि की संरचना

  • पीयूष ग्रंथि मस्तिष्क के आधार पर हाइपोथैलेमस के नीचे सैला टर्सिका में स्थित मटर के दाने के आकार की ग्रंथि है। इसके दो प्रमुख भाग होते हैं। अग्र पीयूष ग्रंथि ग्रंथिल ऊतक से बनी होती है और हाइपोथैलेमस के नियंत्रण में विभिन्न हार्मोन बनाती है। पश्च पीयूष ग्रंथि तंत्रिका ऊतक से बनी होती है तथा हाइपोथैलेमस में बने हार्मोनों का भंडारण एवं स्राव करती है।

प्रमुख हार्मोन एवं कार्य


अग्र पीयूष ग्रंथि के हार्मोन:

  1. वृद्धि हार्मोन (GH) – शरीर की वृद्धि, प्रोटीन निर्माण तथा हड्डियों के विकास को बढ़ावा देता है।
  2. थायरॉइड-उत्तेजक हार्मोन (TSH) – थायरॉइड ग्रंथि को T3 और T4 बनाने के लिए प्रेरित करता है। ये हार्मोन शरीर की चयापचय दर, सामान्य वृद्धि, विकास तथा ऊर्जा के उपयोग के लिए आवश्यक हैं।
  3. एड्रेनोकॉर्टिकोट्रॉपिक हार्मोन (ACTH) – अधिवृक्क ग्रंथि को कॉर्टिसोल बनाने के लिए प्रेरित करता है, जो तनाव तथा शरीर की ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण है।
  4. फॉलिकल-उत्तेजक हार्मोन (FSH) – महिलाओं में अंडाणु के विकास तथा पुरुषों में शुक्राणु निर्माण में सहायक होता है।
  5. ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) – महिलाओं में अंडोत्सर्जन तथा पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के निर्माण को प्रेरित करता है।
  6. प्रोलैक्टिन (PRL) – दूध के निर्माण को बढ़ावा देता है।

पश्च पीयूष ग्रंथि के हार्मोन:

  1. एंटी-डाययूरेटिक हार्मोन (ADH/Vasopressin) – वृक्कों में पानी के पुनःअवशोषण को बढ़ाता है और मूत्र की मात्रा कम करता है।
  2. ऑक्सीटोसिन – प्रसव के समय गर्भाशय के संकुचन तथा स्तन से दूध निकलने में सहायक होता है।

हार्मोनल संतुलन में भूमिका


  • पीयूष ग्रंथि हाइपोथैलेमस और अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों के बीच मुख्य नियंत्रण केंद्र के रूप में कार्य करती है। हाइपोथैलेमस पीयूष ग्रंथि की गतिविधियों को नियंत्रित करता है, जबकि पीयूष ग्रंथि के हार्मोन अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन का संतुलन मुख्य रूप से ऋणात्मक प्रतिपुष्टि द्वारा बना रहता है। थायरॉक्सिन और कॉर्टिसोल जैसे हार्मोनों का स्तर बढ़ने पर हाइपोथैलेमस और पीयूष ग्रंथि से इनसे संबंधित हार्मोन का स्राव कम हो जाता है, जबकि इनके स्तर में कमी होने पर स्राव बढ़ जाता है। इस प्रकार पीयूष ग्रंथि वृद्धि, विकास, प्रजनन, चयापचय, तनाव तथा जल संतुलन को नियंत्रित करके शरीर का आंतरिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।