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हाल ही में आवास एवं शहरी कार्य मंत्री ने UCF के कार्यान्वयन हेतु दिशानिर्देशों के साथ ऋण पुनर्भुगतान गारंटी उप-योजना ( CRGSS ) की शुरुआत की गई है।
शहरी चुनौती कोष (UCF)
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कुल परिव्यय : 1 लाख करोड़ रुपये।
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कुल परिव्यय में से परियोजनाओं के लिए 90,000 करोड़ रुपये, परियोजना निर्माण व क्षमता संवर्द्धन हेतु 5,000 करोड़ रुपये और सीआरजीएसएस के लिए 5,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
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उद्देश्य: लचीले, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल शहरों का निर्माण करना ।
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इस फंड को एक उत्प्रेरक तंत्र के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसका लक्ष्य मार्केट-आधारित फाइनेंसिंग के जरिए निवेश को लगभग चार गुना तक बढ़ाना है।
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नोडल मंत्रालय: आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ।
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प्रकार: केन्द्र प्रायोजित योजना।
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घोषणा: बजट 2025-26 में।
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कार्यान्वयन अवधि: वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 (जिसे 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है)
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फोकस क्षेत्रः
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विकास केंद्र के रूप में शहर।
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शहरों का रचनात्मक पुनर्विकास।
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जल एवं स्वच्छता
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विशेषताएँ:
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UCF से केंद्रीय सहायता
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UCF से परियोजना लागत का 25 % हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा।
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शर्त : परियोजना लागत का कम से कम 50% हिस्सा बाजार स्रोतों से जुटाया जाना चाहिए।
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स्रोतों: नगरपालिका बॉन्ड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) ।
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परियोजनाओं का चयन एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी चैलेंज बेस्ड प्रणाली के माध्यम से किया जायेगा।
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₹5,000 करोड़ का ऋण संवर्धन कोष :
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विशेष रूप से पहली बार बाजार वित्त तक पहुंच प्राप्त करने वाले शहरों सहित टियर-॥ और टियर-III शहरों सहित 4,223 शहरों की ऋण योग्यता बढ़ाने के लिए ।
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ऋण चुकौती गारंटी उप-योजना:
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पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के सभी शहरों/शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) और अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के छोटे यूएलबी (<1,00,000 जनसंख्या) के लिए पहली बार बाजार वित्त तक पहुंच को सुगम बनाना
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छोटे स्थानीय स्थानीय निकायों को पहली बार लिए गए ऋणों के लिए 7 करोड़ रुपये या ऋण राशि का 70 प्रतिशत (जो भी कम हो) तक की केंद्रीय गारंटी प्रदान करेगी।
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पहले ऋण के सफल पुनर्भुगतान पर 7 करोड़ रुपये या ऋण राशि का 50 प्रतिशत (जो भी कम हो) की केंद्रीय गारंटी प्रदान की जाएगी।
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इससे छोटे शहरों में पहली बार न्यूनतम 20 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और बाद की परियोजनाओं के लिए 28 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से समर्थन मिलेगा।
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क्षेत्र:
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10 लाख या उससे अधिक (2025 के अनुमान) जनसंख्या वाले सभी शहर
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उपरोक्त में शामिल न किए गए सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियाँऔर
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एक लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले प्रमुख औद्योगिक शहर शामिल हैं।
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पारंपरिक अनुदान-आधारित वित्तपोषण से हटकर शहरी विकास के बाजार-संबद्ध, सुधार-संचालित और परिणाम-उन्मुख मॉडल की ओर एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है