चर्चा में क्यों?
- भारतीय वैज्ञानिकों ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर लगभग 21–23 किलोमीटर की ऊंचाई पर ओजोन की एक असामान्य रूप से मोटी एवं उच्च-सांद्रता वाली परत का पता लगाया है। यह खोज समताप मंडल में ओजोन के परिवहन तथा वायुमंडलीय परिसंचरण को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

प्रमुख बिंदु
- वैज्ञानिकों ने उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर 21–23 किमी की ऊंचाई पर सामान्य से अधिक ओजोन वाली परत का पता लगाया।
- यह परत एक दिन से अधिक समय तक बनी रही।
- सामान्यतः ओजोन की अधिकतम सांद्रता लगभग 25–30 किमी की ऊंचाई पर पाई जाती है।
- अध्ययन में ARIES, नैनीताल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- ARIES के स्वदेशी रूप से विकसित 206.5 मेगाहर्ट्ज स्ट्रैटोस्फीयर–ट्रोपोस्फीयर (ST) रडार से महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त किए गए।
- अध्ययन NETRAD-ASMA अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत किया गया।
- निष्कर्ष Earth and Space Science में प्रकाशित हुए हैं।
ओजोन परत का महत्व
- ओजोन (O₃) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बना एक अणु है। समताप मंडल में उपस्थित ओजोन सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) विकिरण, विशेषकर UV-B, के एक बड़े हिस्से को अवशोषित करती है।
- इस प्रकार समताप मंडलीय ओजोन पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
असामान्य ओजोन परत का निर्माण कैसे हुआ?
- वैज्ञानिकों ने पाया कि ओजोन की वृद्धि दिन और रात दोनों समय देखी गई। इससे संकेत मिला कि सूर्य के प्रकाश से संचालित प्रकाश-रासायनिक प्रक्रियाएँ इस घटना का प्राथमिक कारण नहीं थीं।
विभिन्न प्रेक्षणों के विश्लेषण से पता चला कि—
| ओजोन-समृद्ध वायु का क्षैतिज परिवहन |
⇓
| वायु का नीचे की ओर संचलन |
⇓
| वायु-द्रव्यमान का संपीड़न |
⇓
| ओजोन की स्थानीय सांद्रता में वृद्धि |
⇒ अर्थात् इस घटना का प्रमुख कारण स्थानीय स्तर पर ओजोन का निर्माण नहीं, बल्कि ओजोन-युक्त वायु का परिवहन एवं उसके बाद नीचे की ओर वायु गति और संपीड़न था।
अध्ययन में किन तकनीकों का प्रयोग किया गया?
- वैज्ञानिकों ने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों को एकीकृत किया—
- वायुमंडलीय रडार नेटवर्क
- मौसम एवं ओजोन मापन वाले गुब्बारे
- Aura MLS उपग्रह
- INSAT-3DR उपग्रह
- उन्नत वायुमंडलीय मॉडल
⇒ देश के विभिन्न हिस्सों से एक साथ आंकड़े एकत्र करके हवा के पैटर्न तथा ऊर्ध्वाधर वायु गति का तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
ARIES की भूमिका
- आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES), नैनीताल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है।
- अभियान के दौरान ARIES में स्वदेशी रूप से विकसित 206.5 MHz ST Radar ने हरिणघाटा, गडांकी और कोच्चि स्थित समान रडारों के साथ मिलकर आंकड़े एकत्र किए।
- यह स्वदेशी रडार भारत में समताप मंडल एवं क्षोभमंडल की वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के अध्ययन की क्षमता को मजबूत करता है।
NETRAD-ASMA अभियान
- यह अध्ययन NETRAD-ASMA अभियान के प्रथम चरण के अंतर्गत किया गया।
- इसका उद्देश्य देश के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाकर पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाली जटिल प्रक्रियाओं तथा वायुमंडलीय परिसंचरण को बेहतर ढंग से समझना है।
- इस अभियान में ARIES के वैज्ञानिक डॉ. मनीष नाजा और डॉ. समरेश भट्टाचार्य सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
खोज का वैज्ञानिक महत्व
- यह अध्ययन भारतीय उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समताप मंडलीय ओजोन के पुनर्वितरण के प्रत्यक्ष मात्रात्मक प्रमाण उपलब्ध कराता है।
- इसके प्रमुख महत्व हैं—
- समताप मंडल में ओजोन के क्षैतिज परिवहन को समझने में सहायता।
- ऊर्ध्वाधर वायु गति और वायुमंडलीय परिसंचरण की भूमिका को समझने में मदद।
- भारतीय क्षेत्र में ओजोन वितरण के बेहतर मॉडल विकसित करने में उपयोगी।
- भारत में स्वदेशी वायुमंडलीय रडार एवं गुब्बारा-आधारित प्रेक्षणों की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
- जलवायु एवं वायुमंडलीय विज्ञान से संबंधित भविष्य के अध्ययनों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
बिंदु तथ्य
- असामान्य ओजोन परत: उत्तरी बंगाल की खाड़ी
- ऊंचाई: लगभग 21–23 किमी
- सामान्य अधिकतम ओजोन सांद्रता: लगभग 25–30 किमी
- प्रमुख संस्थान: ARIES, नैनीताल
- रडार: 206.5 MHz ST Radar
- अभियान: NETRAD-ASMA Phase-I
- प्रमुख उपग्रह: Aura MLS एवं INSAT-3DR
- प्रमुख प्रक्रिया: ओजोन-समृद्ध वायु का परिवहन
- अन्य प्रमुख प्रक्रिया: नीचे की ओर वायु गति एवं वायु-द्रव्यमान का संपीड़न
- संबंधित क्षेत्र: समताप मंडल एवं वायुमंडलीय परिसंचरण
- प्रकाशन: Earth and Space Science
RAS मुख्य परीक्षा हेतु संभावित प्रश्न
प्रश्न: उत्तरी बंगाल की खाड़ी के ऊपर खोजी गई असामान्य ओजोन परत के निर्माण के कारणों तथा इसके वैज्ञानिक महत्व की विवेचना कीजिए।