- विकसित भारत- जी राम जी अधिनियम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम -(मनरेगा) 2005 की जगह लाया गया है।
- उद्देश्य: विकसित भारत@2047 (Viksit Bharat@2047) के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक सुदृढ़ ग्रामीण विकास ढाँचा स्थापित करना।
- सदन से पारित
- लोकसभा: 18 दिसम्बर, 2025;
- राज्यसभा: 19 दिसम्बर, 2025;
- राष्ट्रपति की मंजूरी: 21 दिसम्बर, 2025
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भारत सरकार द्वारा अधिसूचित: 11 मई 2026
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अधिनियम लागू: 1 जुलाई 2026 से
- "महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) 2005 उसी तारीख से निरस्त हो जाएगा।
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वित्तीय प्रावधान: केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु ₹95,692.31 करोड़ की राशि आवंटित की
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रोजगार गारंटी: प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य द्वारा अकुशल शारीरिक श्रम करने की इच्छा व्यक्त करने पर उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की गारंटी प्राप्त होगी।
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रोजगार उपलब्धता की समय-सीमा: आवेदन की तिथि से 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। ऐसा न होने की स्थिति में श्रमिक को बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का अधिकार होगा।
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बेरोजगारी भत्ता: राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष के पहले 30 दिनों के लिए अधिसूचित मजदूरी का न्यूनतम एक-चौथाई और शेष अवधि के लिए आधी मजदूरी दर से भुगतान किया जाएगा।
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भुगतान पद्धति: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में सीधे हस्तांतरण किया जाता ।
- मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल (Muster Roll) समापन के 15 दिनों के भीतर किया जाएगा।
- क्षतिपूर्ति : यदि समयबद्ध मजदूरी का भुगतान नहीं होता है, तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति पाने के पात्र होंगे।
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कार्यस्थल सुविधाएं: कार्यस्थल पर शुद्ध पेयजल, विश्राम हेतु छायादार स्थान, शिशु गृह (क्रेच) और प्राथमिक चिकित्सा पेटी अनिवार्य होनी चाहिए।
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कृषि पीक सीजन में छूटः राज्य सरकारें प्रति वर्ष अधिकतम 60 दिनों की अवधि अधिसूचित कर सकेंगी, इस अवधि में श्रमिकों से कार्य नहीं लिया जाएगा ।
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कार्यक्षेत्र सीमा: निवास से 5 किलोमीटर के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
- यदि रोजगार इससे अधिक दूरी पर (लेकिन ब्लॉक के भीतर) उपलब्ध कराया जाता है, तो श्रमिकों को परिवहन और रहने-सहने के खर्चों के लिए मजदूरी दर का 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।
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ग्राम पंचायतों की भूमिका: परिवारों का पंजीकरण, रोजगार के लिए आवेदन प्राप्त करना, कार्यों का निष्पादन, योजना से संबंधित अभिलेखों का रखरखाव और विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPP) की तैयारी आदि शामिल हैं
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वित्त पोषण का स्वरूप: पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों हेतु 90:10, अन्य राज्यों/विधायिका वाले केन्द्र-शासित प्रदेशों हेतु 60:40 तथा विधायिका रहित केन्द्र-शासित प्रदेशों हेतु 100% केंद्रीय सहायता।
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सामग्री लागत: सामग्री घटक पर होने वाला व्यय जिला स्तर पर कुल बजट का अधिकतम 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
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अनुमत कार्य: चार प्रमुख विषयगत क्षेत्रों (जल सुरक्षा, ग्रामीण व आजीविका अवसंरचना, और चरम मौसम संरक्षण) में कार्यों का क्रियान्वयन।
- सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक के साथ एकीकृत किया जायेगा ।
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विशेष छूट: प्राकृतिक आपदा अथवा असाधारण परिस्थितियों के उद्भव की स्थिति में, राज्य सरकार की अनुशंसा के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा अनुमत कार्यों के दायरे में विस्तार, वैतनिक रोजगार के दिनों में वृद्धि और दस्तावेजीकरण संबंधी विधिक मानदंडों में शिथिलता प्रदान की जा सकती है।
- विकसित ग्राम पंचायत योजना आधारित आयोजना निर्माणः आयोजना का निर्माण ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से किया जाएगा।
- यह पीएम गति शक्ति सहित स्पेशियल टेक्नोलॉजी आधारित प्रणालियों से एकीकृत होंगी।
- प्रशासनिक क्षमता की सुदृढ़ता: प्रशासनिक व्यय की अधिकतम सीमा को 6% से बढ़ाकर 9% किया गया है ।
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मानक आधारित आवंटनः केंद्र सरकार निर्धारित वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर मानक आवंटन जारी करेगी। मानक आंवटन से अतिरिक्त व्यय की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
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पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्वः बायोमेट्रिक, स्पेशियल टेक्नोलॉजी आधारित योजना, मोबाइल/डैशबोर्ड मॉनिटरिंग, साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण और सोशल ऑडिट से पारदर्शिता सुनिश्चित कि जाएगी।
- केन्द्र और राज्य स्तर पर गठित संचालन समितियाँ मानक आवंटन सहित अन्य विषयों पर अनुशंसा करेंगी।
- संस्थागत पर्यवेक्षण: कानून की समीक्षा एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद, राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया जायेगा।
- मजदूरी दर निर्धारणः केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी; नई दरें लागू होने तक MGNREGA की वर्तमान दरें प्रभावी रहेंगी।
- राज्य योजनाएँ: विधेयक लागू होने की तिथि से छह माह के भीतर प्रत्येक राज्य अपनी योजना अधिसूचित करेगा।
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मनरेगा |
वीबी-जी राम जी |
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● प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिनों की मजदूरी रोजगार की गारंटी |
● प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिनों की मजदूरी रोजगार की गारंटी |
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● कार्यों की अनेक और बिखरी हुई श्रेणियाँ, जिनमें रणनीतिक फोकस सीमित है |
● जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, जीविका और जलवायु लचीलापन पर केंद्रित 4 स्पष्ट रूप से परिभाषित प्राथमिकता क्षेत्र |
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● अकुशल मजदूरी की लागत केंद्र सरकार वहन करती है, बेरोजगारी भत्ता राज्य सरकारें देती हैं |
● मजदूरी के लिए राज्य सहभागिता, अधिकांश राज्यों के लिए 60:40, विशेष श्रेणी क्षेत्रों के लिए 90:10 |
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● कोई स्पष्ट वैधानिक “रोक (pause) अवधि” का प्रावधान नहीं |
● राज्य वित्तीय वर्ष में 60 दिनों तक कार्य न कराने की अधिसूचना जारी कर सकते हैं |
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● माँग आधारित फंडिंग, जिनमें आवंटन अप्रत्याशित रहते हैं |
● मानक फंडिंग जो रोजगार गारंटी की रक्षा करते हुए अनुमानित बजटीकरण सुनिश्चित करती है |
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● योजना निर्माण में ग्राम पंचायत की भूमिका केंद्रीय है |
● संस्थागत एकीकरण और अवसंरचना योजना को समाहित करती है |