- हाल ही में 'विश्व शेर दिवस' (10 अगस्त) के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने भारत में एशियाई शेरों के संरक्षण में मिली ऐतिहासिक सफलता की जानकारी साझा की।
- विश्व शेर दिवस (10 अगस्त 2026) की थीम: "Coexist, Conserve, Care" (सह-अस्तित्व, संरक्षण और देखभाल)
- एशियाई शेरों की संख्या: 16वीं एशियाई शेर जनसंख्या अनुमान (मई 2025) के अनुसार:
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वर्ष |
संख्या |
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2015 |
523 |
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2025 |
891 |
- आवास (Habitat) का विस्तार: शेरों का क्षेत्र 2020 के लगभग 30,000 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर अब करीब 35,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है।
एशियाई शेर (Asiatic Lion)
- वैज्ञानिक नाम: Panthera leo leo
- IUCN स्टेटस: Endangered( संकटग्रस्त)।
- कानूनी सुरक्षा: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972: अनुसूची I में सूचीबद्ध और CITES: परिशिष्ट I।
- मुख्य आवास: गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य + आसपास के सैटेलाइट क्षेत्र (बर्दा, मितियाला, गिरनार, अमरेली, भावनगर आदि)।
- चुनौतियाँ: पूरी आबादी एक ही भौगोलिक क्षेत्र में होने से बीमारी या आपदा का खतरा, मानव-शेर संघर्ष (खुले कुएँ, मवेशी हमले), आवास क्षमता।
संरक्षण प्रयास:
प्रोजेक्ट लायन :
- लॉन्च: 15 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में
- यह प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट की तर्ज पर बनाया गया है।
- बजट: लगभग ₹2,927.71 करोड़ का 10-वर्षीय प्रोजेक्ट (Ministry of Environment, Forest and Climate Change द्वारा स्वीकृत)।
- मुख्य उद्देश्य:
- गिर और आसपास के लैंडस्केप में आवास सुधार और विस्तार।
- रोग निगरानी, वैज्ञानिक ट्रैकिंग (रेडियो-कॉलरिंग, कैमरा ट्रैप आदि)।
- स्थानीय समुदायों (जैसे मालधारी) की भागीदारी और आजीविका के अवसर (इको-टूरिज्म आदि)।
- बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को शेरों का “दूसरा घर” विकसित करना।
- नेशनल रेफरल सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ (जूनागढ़) जैसी स्वास्थ्य सुविधाएँ।
- भारत में विशेष महत्व क्योंकि दुनिया की एकमात्र जंगली एशियाई शेर आबादी यहीं (गुजरात के गिर लैंडस्केप) है।
- अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट्स एलायंस (IBCA)