उत्तर:
- किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों, वनस्पतियों व पारितंत्र की विविधता को जैव विविधता कहते हैं। अत्यधिक समृद्ध किंतु संकटापन्न जैव विविधता वाले क्षेत्रों को हॉटस्पॉट (तप्त स्थल) कहा जाता है। इस अवधारणा का प्रतिपादन नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) द्वारा 1988 में किया गया था। वर्तमान में USA की संस्था कंजर्वेशन इंटरनेशनल (CI) द्वारा वैश्विक स्तर पर 36 हॉटस्पॉट मान्यता प्राप्त हैं।
पहचान के अनिवार्य मानदंड (Criteria):
- स्थानिकता (Species Endemism): कम से कम 1,500 संवहनीय पादप प्रजातियाँ (विश्व की कुल प्रजातियों का >0.5%) उस क्षेत्र में स्थानीय (Endemic) होनी चाहिए।
- आवास क्षरण (Threat Level): क्षेत्र की मूल वानस्पतिक संपदा का कम से कम 70% प्राकृतिक आवास नष्ट हो चुका हो।
भारत के प्रमुख जैव विविधता तप्त स्थल (हॉटस्पॉट):
- भारत में विश्व के कुल हॉटस्पॉट भू-भाग का 16.86% भाग (वैश्विक जैव विविधता का ~2.3%) आता है, जिसमें 4 प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:
- हिमालय (The Himalayas): इसका 44.4% भाग भारत में, शेष नेपाल, भूटान आदि में स्थित है।
- प्रमुख प्रजातियाँ: नामदफा गिलहरी, पिग्मी हॉग, हंगुल, कश्मीरी ताहर, लाल पांडा, गंगा डॉल्फिन।
- पश्चिमी घाट व श्रीलंका (Western Ghats & Sri Lanka): इसका 64.9% भाग भारत में (गुजरात से केरल तक) विस्तृत है।
- प्रमुख प्रजातियाँ: लॉयन टेल्ड मकाक, नीलगिरी ताहर, मालाबार सीवेट, ब्लैक रॉबिन, हॉर्नबिल।
- इन्डो-बर्मा (Indo-Burma): इसका 5% भाग पूर्वोत्तर भारत में, शेष म्यांमार, थाईलैंड, लाओस आदि में विस्तृत है।
- प्रमुख प्रजातियाँ: वानर (Ape) प्रजातियाँ, मीठे पानी के कछुए, दुर्लभ पक्षी।
- सुंडालैंड (Sundaland): इसका 1.28% भाग भारत (अंडमान-निकोबार) में, शेष इंडोनेशिया, सिंगापुर, मलेशिया में है।
- प्रमुख प्रजातियाँ: डुगोंग (समुद्री गाय), प्रवाल भित्ति (Coral Reefs), ओलिव रिडले टर्टल, लेदरबैक व्हेल।
पश्चिमी घाट के संरक्षण संबंधी मुद्दे :
- आवास विखंडन: चाय, कॉफी व रबड़ बागानों के विस्तार और सड़क-रेल अवसंरचना से वनों का विखंडन।
- अनियंत्रित खनन: गोवा और कर्नाटक के संवेदनशील ढलानों पर लौह अयस्क व बॉक्साइट का अवैध खनन।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: प्राकृतिक गलियारों (Corridors) के नष्ट होने से हाथी व बाघों का आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश।
- पर्यटन व प्रदूषण: अनियंत्रित पर्यटन से ठोस अपशिष्ट तथा प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीर समस्या।
संरक्षण हेतु प्रमुख प्रयास:
समितियों की सिफारिशें:
- माधव गाडगिल समिति (2011): पूरे पश्चिमी घाट को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) घोषित करने का प्रस्ताव।
- के. कस्तूरीरंगन समिति (2013): लगभग 37% हिस्से को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) के रूप में वर्गीकृत कर भारी खनन व प्रदूषणकारी उद्योगों पर प्रतिबंध की अनुशंसा।
- वैश्विक मान्यता: 2012 में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा 39 स्थलों को 'विश्व धरोहर स्थल' घोषित किया गया।
- संस्थानिक ढाँचा: नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व, साइलेंट वैली नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्रों (PA Network) का गठन और प्रोजेक्ट टाइगर व प्रोजेक्ट एलीफेंट का सफल क्रियान्वयन।