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प्रश्न: मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) क्या है? यह हिंद महासागर क्षेत्र में मानसूनी वर्षा की परिवर्तनशीलता को किस प्रकार प्रभावित करता है? (शब्द सीमा- 150) (UPSC/RAS)

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उत्तर: 

  • ​मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) उष्णकटिबंधीय वायुमंडल में भूमध्य रेखा के सहारे पश्चिम से पूर्व (West to East) की ओर गति करने वाली एक प्रमुख अंतरा-मौसमी (Intra-seasonal) वायुमंडलीय विक्षोभ/हलचल है। इसका आवर्तकाल आमतौर पर 30 से 60 दिन का होता है। यह कोई स्थिर मौसमी प्रणाली नहीं है, बल्कि बादलों, पवनों और वर्षा का एक गतिशील बैंड (पल्स) है जो हिंद महासागर से प्रशांत महासागर की ओर बढ़ता है।

​MJO मूलतः दो विपरीत वायुमंडलीय चरणों (Phases) के चक्रीय युग्म पर कार्य करता है:

  1. ​संवहन चरण (Convective / Enhanced Phase): जब महासागर की सतह का तापमान अधिक होता है, तो निचली गर्म व आर्द्र वायु हल्की होकर तेजी से ऊपर उठती है। वायु के इस ऊर्ध्वाधर प्रवाह को संवहन (Convection) कहते हैं।
    • ​प्रभाव: ऊपर उठने पर संघनन से विशाल कपासी-वर्षी बादल (Cumulonimbus clouds) बनते हैं। इससे सतह पर निम्न दाब (Low Pressure) उत्पन्न होता है, अभिसरण (convergence) बढ़ता है और इस क्षेत्र में अत्यधिक मूसलाधार वर्षा होती है।
  2. ​अवतलन चरण (Suppressed / Subsidence Phase): संवहन क्षेत्र के पीछे या आगे वायुमंडल के ऊपरी स्तर से शुष्क और ठंडी वायु नीचे की ओर बैठती है। वायु के नीचे बैठने की इस प्रक्रिया को अवतलन (Subsidence / Descending) कहा जाता है।
    • ​प्रभाव: वायु के अवतलन से सतह पर उच्च दाब (High Pressure) की स्थिति बनती है और वायु फैलती है (divergence)। अवतलन बादलों के निर्माण और ऊर्ध्वाधर गति को रोकता है, जिससे आकाश साफ रहता है और मौसम शुष्क हो जाता है।
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​हिंद महासागर क्षेत्र में मानसूनी वर्षा की परिवर्तनशीलता पर प्रभाव

  • ​सक्रिय और शुष्क दौर (Active & Break Periods): जब MJO का संवहन चरण हिंद महासागर के ऊपर होता है, तब दक्षिण-पश्चिम मानसून मजबूत होकर 'सक्रिय दौर' (Active Spell) में प्रवेश करता है। इसके विपरीत, अवतलन चरण आने पर वर्षा रुक जाती है और 'मानसून ब्रेक' (Dry Spell) की स्थिति बनती है।
  • ​अवदाब व चक्रवातों का निर्माण: संवहन चरण हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी व अरब सागर) में निम्न दाब के गर्त, अवदाब (Depressions) और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विकास के लिए अनुकूल ऊष्मा व आर्द्रता उपलब्ध कराता है।
  • ​एल-नीनो प्रभाव का संतुलन: यदि प्रशांत महासागर में एल-नीनो (El Niño) के कारण मानसून कमजोर हो रहा हो, लेकिन MJO का अनुकूल संवहन चरण हिंद महासागर में सही समय पर सक्रिय हो जाए, तो यह एल-नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सामान्य वर्षा कराने में मदद करता है।
  • ​वर्षा का स्थानिक व कालिक वितरण: यह मानसून के आगमन (Onset) और मौसमी वर्षा के समय व मात्रा के उतार-चढ़ाव (Variability) को सीधे नियंत्रित करता है।
  • ​MJO का संवहन एवं अवतलन चक्र हिंद महासागर के मानसून में अंतरा-मौसमी परिवर्तनों का मुख्य नियामक इंजन है।