उत्तर:
⇒ 17वीं सदी के अंत से 18वीं सदी तक चले 'प्रबोधन काल' ने यूरोप की सोच में एक बड़ा बदलाव लाया। इस दौर में पुरानी परंपराओं और अंधविश्वासों की जगह तर्क, जाँच-पड़ताल और व्यक्तिगत आजादी को महत्व दिया जाने लगा। वैज्ञानिक क्रांति की मदद से लोगों ने पुरानी व्यवस्थाओं और राजा-चर्च की असीमित शक्तियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। किताबों, अखबारों और विचार-सभाओं के ज़रिए ये विचार पूरे यूरोप में फैल गए। यह केवल दर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके कारण कई क्रांतियाँ हुईं, नए कानून बने और सुधार हुए, जिन्होंने यूरोप का भविष्य हमेशा के लिए बदल दिया।
1. राजनीतिक बदलाव
- राजाओं के "भगवान द्वारा शासन करने के अधिकार" (दैवी अधिकार) का विचार खत्म होने लगा, जिससे फ्रांस और रूस जैसे देशों में राजाओं की निरंकुश सत्ता कमजोर पड़ गई।
- जॉन लॉक के सिद्धांत - "कि हर इंसान को जीने, आजादी और संपत्ति का प्राकृतिक अधिकार है"— ने लोकतंत्र और संविधान बनाने के आंदोलनों को जन्म दिया।
- रूसो ने कहा कि "असली ताकत जनता की अपनी इच्छा में होती है", जिससे गणतंत्र (प्रजातंत्र) की सोच मजबूत हुई।
- मोंटेस्क्यू ने कानून बनाने वाली (विधायिका), कानून लागू करने वाली (कार्यपालिका) और न्याय करने वाली (न्यायपालिका) संस्थाओं को अलग-अलग रखने का सुझाव दिया, जो आज के लोकतांत्रिक देशों का आधार है।
- इन सब विचारों ने मिलकर अमेरिका की आजादी की लड़ाई और फ्रांस की क्रांति की नींव रखी, जिससे पुराने सामंती विशेषाधिकार खत्म होने लगे।
2. विज्ञान और ज्ञान का विकास
- न्यूटन और गैलीलियो की खोजों ने चर्च की पुरानी सोच को गलत साबित किया और यह दिखाया कि सच्चाई को सबूतों और तर्क से ही समझा जा सकता है।
- दिदरो द्वारा बनाई गई 'विश्वकोश' (Encyclopédie) किताब ने विज्ञान और ज्ञान को आम लोगों तक पहुँचाया, जिससे यह केवल अमीर वर्ग तक सीमित नहीं रहा।
3. आर्थिक बदलाव
- एडम स्मिथ ने कहा कि व्यापार पर सरकार का कड़ा नियंत्रण नहीं होना चाहिए (मुक्त बाजार)। इससे व्यापार और आपस में मुकाबला (प्रतिस्पर्धा) बढ़ा।
- व्यापार और बैंकिंग बढ़ने से एक नया और मजबूत मध्यम वर्ग (व्यापारी और उद्योगपति) उभरकर सामने आया।
- प्रबोधन काल के वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने आगे चलकर 19वीं सदी की औद्योगिक क्रांति और नई मशीनों के आविष्कार में मदद की।
4. सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव
- वॉल्टेयर ने अपनी बात कहने की आजादी, सहनशीलता और धर्मनिरपेक्षता की वकालत की, जिससे समाज और राजनीति पर चर्च का असर कम हुआ।
- पढ़ाई-लिखाई का विस्तार होने से ज्ञान पर चर्च का एकाधिकार टूट गया।
- मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट की किताबों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए शुरुआती आवाज उठाई, जिससे आगे चलकर नारीवादी आंदोलनों की शुरुआत हुई।
5. धार्मिक सोच में बदलाव
- ईश्वरवाद (Deism) और नए धार्मिक विचारों के फैलने से धर्म को लेकर कट्टरता कम हुई और यूरोप में धार्मिक झगड़े शांत होने लगे।
6. कानूनी और मानवीय सुधार
- प्रबोधन के विचारों की वजह से ब्रिटेन और फ्रांस में गुलामी (दास प्रथा) को खत्म करने के आंदोलन शुरू हुए।
- नेपोलियन के बनाए कानूनों (Napoleonic Code) ने तर्क और समानता पर आधारित नियम बनाए, जिसने फ्रांस के बाहर भी कई देशों की कानून व्यवस्था को प्रभावित किया।
निष्कर्ष:
⇒ राजनीति, अर्थव्यवस्था, धर्म और समाज में पुरानी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाकर प्रबोधन काल ने यूरोप की पुरानी भेदभावपूर्ण व्यवस्था को खत्म कर दिया। इसने जनता के शासन, खुले व्यापार, धर्मनिरपेक्ष संस्थाओं और सबके लिए एक जैसे कानून की शुरुआत की। तर्क और अधिकारों पर इसका जोर आज भी दुनिया के लोकतांत्रिक और कानूनी ढाँचे की नींव है, जिसने यूरोप के इतिहास को पूरी तरह बदल दिया।