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'नमो ग्रीन रेल' पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन

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  • भारतीय रेलवे, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 'शुद्ध-शून्य' (Net Zero) लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में, 17 जुलाई 2026 को देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन करने जा रहा है।

  • यह ऐतिहासिक ट्रेन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत खंड (हरियाणा) पर चलाई जाएगी। यह 10-कार (डिब्बों) वाली ट्रेन होगी

  • प्रणोदन प्रणाली: पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के बजाय 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित होगी।

  • नई ट्रेन में डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (DPRS) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।

  • गतिः अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे

  • लगभग 2,600 यात्री क्षमता।

  • निर्माणः इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई में

  • डिजाइनः अनुसंधान, डिजाइन और मानक संगठन (RDSO), लखनऊ द्वारा

  • यह 'Hydrogen for Heritage' पहल का हिस्सा है, जिसके तहत भारतीय रेलवे की विरासत स्थलों और पहाड़ी मार्गों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना है।

  • जींद में हरित हाइड्रोजन उत्पादन प्लांट (इलेक्ट्रोलिसिस आधारित) और स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की सुविधा स्थापित की गई है (क्षमता: 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन)।

  • इस ट्रेन के चालू होने के साथ ही भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे दुनिया के उन गिने-चुने देशों के समूह में शामिल हो जाएगा, जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल परिवहन की तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।  जर्मनी व्यावसायिक हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों को शुरू करने वाला पहला देश है।

हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक कैसे काम करती है?

  • इस ट्रेन में 'प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल' (PEMFC) का उपयोग किया गया है।

  • यह एक ईंधन सेल है जो प्रोटॉन-कंडक्टिंग परफ्लुओरोसल्फोनिक एसिड (पीएफएसए) पॉलिमर झिल्ली में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया कराकर बिजली उत्पन्न करता है।

  • उप-उत्पाद: इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कोई हानिकारक उत्सर्जन नहीं होता। उप-उत्पाद के रूप में केवल जल वाष्प और ऊष्मा पैदा होती है।

  • ऊर्जा दक्षता: हाइड्रोजन डीजल (43 MJ/kg) की तुलना में कहीं अधिक ऊर्जा (120 MJ/kg) प्रदान करता है।

 

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