भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है, जहाँ निजी क्षेत्र की भागीदारी और सरकारी नीतिगत समर्थन इसे वैश्विक स्तर पर एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
- विकास की गति
- भारत का लक्ष्य अपनी वैश्विक हिस्सेदारी को बढ़ाकर 2040 तक 10% तक ले जाना है।
- वर्ष अर्थव्यवस्था का आकार वैश्विक हिस्सा
- 2023 $8.4 बिलियन ~2%
- 2033 (अनुमानित) $44 बिलियन ~8%
- 2040 (अनुमानित) $100 बिलियन ~10%
2. नीतिगत और पारिस्थितिकी तंत्र समर्थन
- सरकार ने अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है:
नीतिगत ढांचा - भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: क्षेत्र के नियमन और विकास हेतु व्यापक नीति।
- उदारीकृत FDI नीति: विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए आसान नियम।
- IN-SPACe NGP: निजी क्षेत्र के लिए स्पष्ट मानदंड, दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं।
वित्तीय प्रोत्साहन
- वेंचर कैपिटल फंड (1,000 करोड़ रुपये): स्टार्टअप्स की वृद्धि के चरण में मदद के लिए SIDBI के साथ साझेदारी।
टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड (500 करोड़ रुपये): नवाचार को व्यावसायिक उत्पाद बनाने के लिए।
सीड फंड योजना: विचार और प्रोटोटाइप चरण में 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान।
तकनीकी और बुनियादी ढांचा
ISRO का सहयोग: ISRO की सुविधाओं और मार्गदर्शन का लाभ निजी कंपनियों (NGE) को रियायती दर पर।
POEM और परीक्षण: 'सैटेलाइट बस' और 'ग्राउंड स्टेशन एज अ सर्विस' मॉडल, साथ ही POEM मंच पर अंतरिक्ष योग्यता का परीक्षण।
तकनीकी केंद्र: अंतरिक्ष प्रणालियों के परीक्षण हेतु किफायती सुविधा।
3. स्टार्टअप और प्रतिभा विकास
- निजी क्षेत्र का तेजी से उदय भारत की 'स्पेस-टेक' क्रांति की रीढ़ बना है:
- स्टार्टअप बूम: 2019 में एकल अंक से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400+ स्टार्टअप्स।
- निवेश: पिछले 5 वर्षों में $600 मिलियन से अधिक का निजी निवेश।
- कौशल विकास: 17 विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से 900+ पेशेवरों को प्रमाणन।
- विद्यार्थी प्रयोगशालाएं: छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देने हेतु 7 विशेष प्रयोगशालाओं की स्थापना।
4. वैश्विक भागीदारी और प्रभाव
- भारत ने अपनी अंतरिक्ष कूटनीति को विस्तार दिया है, जिसके तहत:
- वैश्विक नेटवर्क: 45 से अधिक देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी।
- व्यावसायिक आउटरीच: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के माध्यम से भारतीय निजी कंपनियों के लिए अवसरों की खोज।