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ULPGM और अग्निका vtol 1 FPV 

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  • भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए दो नए स्वदेशी अत्याधुनिक घातक हथियारों से लैस किया गया है।
  • इनमें पहला, ड्रोन (यूएवी) से लांच किया जाने वाली गाइडेड लोइटरिंग म्यूनिशन - यूएलपीजीएम (यूएवी लांच्ड प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन) है
  • दूसरा, हवा में सीधी उड़ान भरने की क्षमतावाला कामीकाजी ड्रोन 'अग्निका वीटीओएल-1 एफपीवी' शामिल हैं।
  • विकास: DRDO और अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने संयुक्त रूप से
  • इन्हें सेना की आपातकालीन खरीद (ईपी-6) के तहत उपलब्ध कराया गया है। 
  • ये सिस्टम कठिन युद्ध परिस्थितियों, ऊंचाई वाले इलाकों और इलेक्ट्रानिक वारफेयर जैसे माहौल में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
  • इन युद्धक प्रणालियों के जरिये सेना को आतंकवाद विरोधी अभियानों, सीमा पार घुसपैठ रोकने, पहाड़ी युद्धक्षेत्रों और शहरी संघर्षों में बड़ी रणनीतिक बढ़त मिल सकेगी।
  • यह उपलब्धि 'आत्मनिर्भर भारत' और स्वदेशी रक्षा तकनीक की दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
  • लोइटरिंग म्यूनिशन अपने लक्ष्य की तलाश में हवा में घूमता रहता है और टारगेट के रेंज में आते ही उस पर हमला कर देता है।
  • यह प्रणाली उन हालात में भी कारगर साबित होगी, जहां दुश्मन जीपीएस या संचार नेटवर्क को जाम करने की कोशिश करे।
  • एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग तकनीक से लैस यह सिस्टम सीमावर्ती इलाकों, दुर्गम पहाड़ी मोर्चों और इलेक्ट्रानिक युद्ध के वातावरण में सेना को बड़ी बढ़त देगा।
  • यूएवी की आपरेशनल रेंज 20 किलोमीटर है, जबकि म्यूनिशन ढाई किलोमीटर दूर तक लक्ष्य भेद सकता है। इसकी सटीकता एक मीटर तक की है।

अग्निका ड्रोन

  • देश का पहला एफपीवी कामीकाजी ड्रोन बताया जा रहा है।
  • इसे उड़ान भरने के लिए रनवे की जरूरत नहीं पड़ती।
  • इसे शहरी युद्ध, संकरी गलियों, सीमा चौकियों और कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में इस्तेमाल के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है।
  • यह ड्रोन ऐसे हालात में भी दुश्मन पर हमला कर सकता है, जहां जीपीएस काम न कर रहा हो या इलेक्ट्रानिक वारफेयर चल रहा हो।
  • पांच किलोमीटर की रेंज, 30 मिनट की उड़ान क्षमता और 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार इसे तेजी से हमला करने वाला प्रभावी हथियार बनाती है।
  • इसकी मारक सटीकता पांच मीटर तक है