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चर्चा में क्यों? 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट 1 फरवरी, 2026 को संसद में प्रस्तुत की गई।
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अवधि: 5 वर्ष (2026-27 से 2030-31)
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अनुच्छेद 281 के तहत, केंद्र सरकार वित्त आयोग की रिपोर्ट तथा उस पर की गई कार्यवाही का विवरण (Action Taken Memorandum) संसद के समक्ष प्रस्तुत करती है।
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गठन तथा संरचना : अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पॉंच वर्ष में।
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संरचना
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अध्यक्ष :डॉ. अरविंद पनगढ़िया
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सदस्य
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अजय नारायण झा (टी रबी शंकर द्वारा प्रतिस्थापित)
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एनी जॉर्ज मैथ्यू
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डॉ निरंजन राजाध्यक्ष (डॉ मनोजा पांडा द्वारा प्रतिस्थापित)
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डॉ सौम्या कांति घोष
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सचिव: ऋत्विक रंजनम पांडे
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वित्त आयोग
कार्य:
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सिफारिश
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केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा
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केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में राज्यों का हिस्सा 41% सिफारिश किया गया है। (15वें वीएफसी - 41%)
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विभाज्य पूल केंद्रीय सरकार द्वारा एकत्र सकल कर राजस्व से संग्रह लागत, उपकर और अधिभार घटाने के बाद प्राप्त होता है।
वितरण मानदंड

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प्रति व्यक्ति GSDP दूरी (आय दूरी):
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16वें वित्त आयोग ने आय दूरी को इस रूप में परिभाषित किया है कि यह किसी राज्य के प्रति व्यक्ति GSDP और उन तीन बड़े राज्यों के प्रति व्यक्ति GSDP के औसत के बीच का अंतर है, जिनका प्रति व्यक्ति GSDP सबसे अधिक है।
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जिन राज्यों का प्रति व्यक्ति GSDP कम है, उन्हें इस मानदंड के अंतर्गत अधिक हिस्सा मिलेगा।
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यह अंतर-राज्यीय वित्तीय हस्तांतरण में समानता सुनिश्चित करने में सहायता करेगा।
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जनसंख्या: राज्य की जनसंख्या – 2011 की जनगणना के अनुसार।
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जनसांख्यिकीय प्रदर्शन (Demographic Performance):
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16वें वित्त आयोग ने इसे पुनर्परिभाषित किया है ताकि कुल प्रजनन दर (TFR) में परिवर्तन के बजाय 1971 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखा जा सके।
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जिन राज्यों की जनसंख्या वृद्धि कम होगी, उन्हें इस पैरामीटर के अंतर्गत अधिक हिस्सा मिलेगा।
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वन (Forest):
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16वें वित्त आयोग ने किसी राज्य के कुल वन क्षेत्र में उसके हिस्से तथा 2015 से 2023 के बीच कुल वन क्षेत्र में हुई वृद्धि में उसके हिस्से—दोनों को वेटेज दिया है।
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इसके अतिरिक्त, कुल वन क्षेत्र निर्धारित करते समय खुले वनों (Open Forests) को भी शामिल किया गया है।
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15वें वित्त आयोग ने केवल सघन और मध्यम सघन वनों को ही माना था।
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GDP में योगदान (Contribution to GDP):
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16वें वित्त आयोग ने राष्ट्रीय GDP में योगदान को ध्यान में रखने के लिए यह नया पैरामीटर जोड़ा है।
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यह 15वें वित्त आयोग द्वारा उपयोग किए गए कर और वित्तीय प्रयास (Tax and Fiscal Efforts) पैरामीटर का स्थान लेता है, जो अधिक कर संग्रह दक्षता वाले राज्यों को पुरस्कृत करता था।
3. अनुदान (Grants-in-aid)
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16वें वित्त आयोग ने ₹9.47 लाख करोड़ के अनुदान की सिफारिश की है। इनमें शामिल हैं—
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शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अनुदान
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आपदा प्रबंधन के लिए अनुदान
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16वें वित्त आयोग ने 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित निम्नलिखित अनुदानों को समाप्त कर दिया है:
- राजस्व घाटा अनुदान
- क्षेत्र-विशिष्ट अनुदान
- राज्य-विशिष्ट अनुदान

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स्थानीय निकायों के लिए अनुदान:
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ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए ₹4.4 लाख करोड़ और शहरी स्थानीय निकायों के लिए ₹3.6 लाख करोड़ के अनुदान की सिफारिश की है।
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इन अनुदानों को मूल (80%) और प्रदर्शन-आधारित (20%) घटकों में विभाजित किया गया है।
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मूल अनुदान (Basic grants): मूल अनुदान का 50% बिना शर्त (Untied) होगा
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- स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, और/या
- जल प्रबंधन।
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प्रदर्शन अनुदान (Performance grants): स्थानीय निकायों के लिए ये अनुदान आगे दो भागों में विभाजित किए गए हैं - राज्य प्रदर्शन अनुदान और स्थानीय निकाय प्रदर्शन अनुदान।

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शहरी स्थानीय निकाय
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इनके लिए विशेष अवसंरचना अनुदान और शहरीकरण प्रीमियम अनुदान की भी सिफारिश।
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विशेष अवसंरचना अनुदान (Special infrastructure grants)
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10 से 40 लाख जनसंख्या वाले शहरों के लिए ( जनगणना -2011)
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समग्र अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली के विकास से जुड़ा होगा।
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राजस्थान से पात्र शहर : जयपुर, जोधपुर
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- शहरीकरण प्रीमियम अनुदान
- राज्यों को एकमुश्त रूप से जारी किए जाएंगे
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आंवटित राशि -₹10,000 करोड़
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परि-शहरी गाँवों को समीपवर्ती शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में विलय करने के लिए, तथा
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ग्रामीण से शहरी संक्रमण नीति के निर्माण के लिए।
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आपदा प्रबंधन अनुदान (Disaster management grants):
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राज्य आपदा राहत एवं प्रबंधन कोष (SDRF और SDMF) के लिए ₹2,04,401 करोड़ के आपदा प्रबंधन कोष की सिफारिश की है।
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कुल राशि में केंद्र का हिस्सा ₹1,55,916 करोड़ होगा।
- केंद्र और राज्यों के बीच लागत साझा करने का अनुपात इस प्रकार सुझाया गया है—
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उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10, तथा
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अन्य सभी राज्यों के लिए 75:25
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सुधारों के लिए सिफारिशें
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राजकोषीय रोडमैप (Fiscal Roadmap):
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केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2030-31 तक राजकोषीय घाटा GDP के 3.5% तक लाना चाहिए।
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राज्यों के लिए वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा GSDP के 3% पर निर्धारित करने की सिफारिश की गई है।
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राज्यों द्वारा ऑफ-बजट उधारी की प्रथा को सख्ती से समाप्त करने और ऐसी सभी उधारियों को उनके बजट में शामिल करने की भी सिफारिश की गई है।
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राजकोषीय घाटे और ऋण की परिभाषा का विस्तार कर उसमें सभी प्रकार की ऑफ-बजट उधारियों को समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
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विद्युत क्षेत्र सुधार (Power-sector reforms):
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आयोग ने सिफारिश की कि राज्य बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के निजीकरण की दिशा में सक्रिय रूप से प्रयास करें।
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डिस्कॉम के अधिग्रहण के बाद निजी निवेशक को ऋण भार से बचाने के लिए, ऋण को समाहित करने हेतु एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) बनाया जा सकता है।
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सब्सिडी व्यय सुधार (Subsidy Expenditure Reforms):
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आयोग ने राज्यों को अपनी सब्सिडी व्यय की समीक्षा और युक्तिकरण (rationalisation) करने की सिफारिश की है।
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इसने यह भी उल्लेख किया कि बिना शर्त नकद अंतरण (unconditional cash transfers) वाली योजनाओं में लाभार्थियों की संख्या बड़ी और लक्ष्यहीन होती है।
राजस्थान

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14वाँ वित्त आयोग – 5.5%, 15वाँ वित्त आयोग – 6.03%, 16वाँ वित्त आयोग – 5.93%
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हालाँकि, राज्य का कुल आवंटन ₹83,940.45 करोड़ से बढ़कर ₹90,445.85 करोड़ हो गया।
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राजस्थान को अनुदान (Grant-in-Aid to Rajasthan)
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आधार |
ग्रामीण स्थानीय निकाय अनुदान (Rural Local Body Grants) |
शहरी स्थानीय निकाय अनुदान (ULB Grants) |
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मूल (Basic) |
₹25,173 करोड़ |
₹10,145 करोड़ |
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RLB / ULB प्रदर्शन |
₹3,147 करोड़ |
₹1,268 करोड़ |
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राज्य प्रदर्शन |
₹3,147 करोड़ |
₹1,268 करोड़ |
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आपदा प्रबंधन अनुदान (Disaster Management Grants): ₹9,211 करोड़ |
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