उत्तर -
- राजस्थान की प्रमुख महिला सन्त- मीराबाई, राना बाई, करमा बाई, सहजोबाई, दयाबाई, गवरी बाई आदि की-
1. समाज सुधार में भूमिका-
- स्थानीय भाषा के विकास- इन महिला सन्तों के उपदेशों व साहित्य की भाषा भी स्थानीय थी। जैसे- मीराबाई-'सत्यभामा जी नू रूसणो, नरसी जी रो मायरो (मारवाड़ी), सहजोबाई- 'सहजबोध' (मेवाती) तथा दयाबाई-'दयाबोध' (मेवाती) ।
- इन महिला सन्तों में स्त्री शिक्षा पर जोर देकर महिला सशक्तीकरण का समर्थन किया। जैसे- करमा बाई, गवरी बाई आदि।
- समाज में व्याप्त सामाजिक बुराईयों जैसे सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा पुर्नविवाह का विरोध किया।
- गुरू के महत्व को समझाया। जैसे- राना बाई ने चतुरदास को, मीरा बाई ने संत रैदास को अपना गुरु माना।
2. धर्म सुधार में योगदान -
- मध्यकालीन भक्ति आन्दोलनों का राजस्थान में नेतृत्व महिला सन्तों के द्वारा किया गया जिसमें मीराबाई का अद्वितीय योगदान रहा।
- धार्मिक आडम्बरों एवं पुरोहितवाद को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- एकेश्वरवाद के सिद्धान्त को अपनाया। उदाहरण- मीरा बाई एकमात्र कृष्ण की भक्ति।
- इन्होंने सगुण भक्ति परम्परा को बढ़ावा दिया। जैसे- मीरा, राना बाई ने कृष्ण भक्ति।
- इन के भक्ति काव्य एवं भक्ति साहित्य जन साधारण के लिए प्रेरणा का स्त्रोत एवं आदर्श है। जैसे मीरा बाई का रुक्मणी मंगल।
- सामाजिक-धार्मिक जड़ता को कुछ सीमा तक कम करने में इनका अमूल्य योगदान रहा।