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प्रश्न: "मुगल काल में भाषा, साहित्य एवं संगीत के क्षेत्र में एक समावेशी साझी संस्कृति (गंगा-जमुनी तहज़ीब) का विकास हुआ।" प्रमुख रचनाओं, अनुवाद कार्यों और संगीत परंपराओं के उदाहरण देते हुए स्पष्ट करें। (10 अंक/शब्द सीमा: 150 शब्द) (UPSC/RAS)

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उत्तर:

  • ​मुगल काल में भाषा, साहित्य, शिक्षा और संगीत के अभिसरण ने एक संश्लिष्ट एवं समावेशी 'गंगा-जमुनी तहज़ीब' को जन्म दिया। यह समन्वय केवल दरबारी संरक्षण तक सीमित न रहकर तुर्की, फारसी, अरबी तथा स्थानीय ब्रजभाषा व संस्कृत के आत्मसातीकरण का परिणाम था।

​शैक्षणिक अवसंरचना व अनुवाद कार्य:


  • संस्कृति के आदान-प्रदान हेतु संस्थागत प्रयास किए गए।
  • ​शिक्षा विस्तार: बाबर ने 'शुहरत-ए-आम' (सार्वजनिक निर्माण/शिक्षा विभाग) की स्थापना की। 
  • हुमायूँ ने दीनपनाह में 'शेरमंडल पुस्तकालय' बनवाया।
  • महाम अनगा द्वारा 'मदरसा-ए-बेगम' और औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा द्वारा दिल्ली में 'बैत-उल-उलूम' (मदरसा) की स्थापना की गई (जहाँ मकतब प्राथमिक और मदरसा उच्च शिक्षा केंद्र थे)।

​अनुवाद विभाग (मकतबखाना):

  • अकबर ने फ़ैज़ी की अध्यक्षता में अनुवाद विभाग गठित किया।
  • अबुल फज़ल ने 'पंचतंत्र' का फारसी अनुवाद अनवर-ए-सुहैली नाम से (मौलाना हुसैन वाइज़ काशफ़ी के आधार पर) तथा फ़ैज़ी ने गणितीय ग्रंथ लीलावती का अनुवाद किया। 
    दारा शिकोह ने 52 उपनिषदों का 'सिर्र-ए-अकबर', भगवद्गीता व योग-वाशिष्ठ का फारसी अनुवाद कराकर सांस्कृतिक सेतु को सुदृढ़ किया।

​साहित्यिक विकास एवं प्रमुख रचनाएँ:


  • ​बाबर व हुमायूँ: बाबर ने तुर्की भाषा में आत्मकथा तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) तथा दीवान (तुर्की काव्य संकलन) रचा एवं 'खत-ए-बाबरी' लिपि बनाई। 
  • गुलबदन बेगम ने हुमायूँनामा तथा खोंदमीर ने कानून-ए-हुमायूनी लिखी।
  • ​अकबर कालीन समन्वय: अबुल फज़ल ने अकबरनामा (तृतीय भाग: आईन-ए-अकबरी) रचा।
  • फैज़ी सरहिंदी ने भी अकबरनामा लिखा, जबकि अब्दुल कादिर बदायूँनी ने मुन्तखब-उत-तवारीख में समकालीन यथार्थ दर्ज किया।
  • इसी दौर में तुलसीदास, सूरदास तथा रसखान ने जनभाषा में भक्ति साहित्य को समृद्ध किया।
  • ​जहाँगीर से उत्तरवर्ती काल: जहाँगीर ने स्वयं तुजुक-ए-जहाँगीरी लिखी। शाहजहाँ काल में इनायत खाँ ने शाहजहाँनामा तथा चंद्रभान 'ब्राह्मण' ने फारसी में चार चमन की रचना की। 
  • औरंगजेब के काल में ईश्वरदास नागर ने फ़ुतुहात-ए-आलमगीरी लिखी।

​संगीत परंपराएँ व साझी विरासत:


अकबर के काल में संगीत का स्वर्ण-युग आरंभ हुआ, जहाँ ग्वालियर की ध्रुपद शैली का शास्त्रीय विकास हुआ:

  • ​अकबर दरबार: अबुल फज़ल के अनुसार 36 प्रमुख संगीतकार थे, जिनमें तानसेन (रागाध्यक्ष) सबसे प्रमुख थे। अबुल फज़ल ने लिखा—"तानसेन जैसा संगीतकार पिछले 1000 वर्षों में नहीं हुआ।" अन्य गुणीजनों में बाज़ बहादुर, बैजू बावरा,
  • गोपाल और सुभान खाँ शामिल थे। तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास भी इसी दौर के महान संत-संगीतकार थे।
  • ​जहाँगीर व शाहजहाँ: जहाँगीर के समय मक्कू, बिलास खाँ (तानसेन के पुत्र) तथा शौकी (गज़ल गायक, उपाधि: 'आनंद खाँ') प्रमुख थे। शाहजहाँ ने लाल खाँ (उपाधि: 'गुणसमुद्र') तथा विलास खाँ/विश्राम खाँ को संरक्षण दिया।
  • ​औरंगजेब का विरोधाभास: औरंगजेब स्वयं वीणा बजाने में निपुण था। 10वें वर्ष में उसने दरबारी संगीत पर पाबंदी लगाई (जिस पर संगीतकारों ने प्रतीकात्मक रूप से संगीत का 'जनाज़ा' निकाला), परंतु दिलचस्प तथ्य यह है कि सर्वाधिक फारसी संगीत ग्रंथ उसी के शासनकाल में लिखे गए।

​निष्कर्ष:

  • फारसी और भारतीय सुर-ताल तथा लेखनी के इस संगम ने एक ऐसी साझी विरासत गढ़ी, जिसने मध्यकालीन भारतीय समाज को वैचारिक और भावनात्मक रूप से एक सूत्र में पिरोया।