उत्तर -
- राजनीतिक स्थिरता, सुदृढ़ शांति और अपार आर्थिक सम्पन्नता के दौर में शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान मुग़ल वास्तुकला में अभूतपूर्व प्रगति और परिपक्वता देखी गई। इस काल में अकबर कालीन लाल बलुआ पत्थर की दृढ़ता व सादगी का स्थान श्वेत संगमरमर की कोमलता, विलासिता, भव्यता और अत्यंत सूक्ष्म तकनीकी व कलात्मक नवाचारों ने ले लिया।
प्रमुख विशेषताएँ एवं नवाचार:
- नींव निर्माण में कुओं की तकनीकी प्रणाली (Well Foundation Technique): दलदली और रेतीली भूमि पर भारी इमारतों को स्थिरता देने के लिए गहरी खुदाई कर कुओं की शृंखला बनाई गई। इनमें महोगनी/आबनूस की लकड़ी के चक्के डालकर पत्थरों व चूने के गारे से भरा गया तथा ऊपर मेहराबी संरचना बनाकर मुख्य भार को संतुलित किया गया।
- उदाहरण: यमुना नदी के किनारे स्थित ताजमहल की नींव इसी कुआं-पद्धति पर आधारित है, जहाँ लकड़ी को भूमिगत जल से लगातार नमी मिलती है और इमारत सदियों से बिना धंसे सुरक्षित खड़ी है।
- अत्यंत अलंकृत भवन एवं नक्काशीदार संगमरमरी स्तंभ: भवनों के आंतरिक और बाह्य भागों में अत्यधिक अलंकरण किया गया। खंभों को गोलाकार या बहुकोणीय रूप देकर उनके आधार और शीर्ष पर कमल, गुलदस्ते और घुमावदार पर्णिल बेल-बूटों की सूक्ष्म नक्काशी की गई।
- उदाहरण: दिल्ली के लाल किले स्थित दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास के संगमरमरी स्तंभ तथा उनकी मेहराबें इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। दीवान-ए-खास की अलंकृत छत और दीवारों की भव्यता को देखकर ही इसे "गर फिरदौस बर रू-ए ज़मीं अस्त" (धरती पर स्वर्ग) कहा गया था।
- सुलेखन द्वारा क़ुरान की आयतों का अंकन (Calligraphy): इमारतों के मुख्य द्वारों और मेहराबी चौखटों पर काले संगमरमर की जड़ाई से अरबी लिपि (सुलुस शैली) में क़ुरान की आयतें उकेरी गईं। इसमें एक अनूठा दृश्य नवाचार यह था कि नीचे से ऊपर जाते हुए अक्षरों का आकार बड़ा रखा गया ताकि नीचे खड़े दर्शक को सभी पंक्तियाँ एक समान अनुपात में दिखाई दें।
- उदाहरण: ताजमहल के विशाल मुख्य प्रवेश द्वार (दरवाजा-ए-रौजा) और मकबरे के मुख्य मेहराब पर सुलेखक अमानत ख़ान शिराज़ी द्वारा अत्यंत सूक्ष्मता से उकेरी गई क़ुरान की आयतें।
- श्वेत संगमरमर का मुख्य निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग: निर्माण कार्यों में मकराना (राजस्थान) के उच्च गुणवत्ता वाले श्वेत संगमरमर को प्रधानता दी गई, जिसने भवनों को अद्वितीय चमक, सात्विकता और कोमलता प्रदान की।
- उदाहरण: आगरा के किले में स्थित मोती मस्जिद पूर्णतः दूधिया सफेद संगमरमर से तराशी गई है, जो अपनी सादगी और आध्यात्मिक प्रभाव के लिए प्रसिद्ध है।
- पित्रा-दूरा (Pietra Dura / पर्चिनकारी) की जड़ाई कला: संगमरमर के पत्थरों को काटकर उनमें अकीक, फिरोजा, नीलम, जेड और मूँगा जैसे बहुमूल्य व अर्ध-कीमती रत्नों से बेल-बूटे और फूल-पत्तियों की बारीक जड़ाई की गई।
- उदाहरण: ताजमहल के मुख्य समाधि कक्ष की अष्टकोणीय संगमरमरी जाली और भीतरी दीवारें, साथ ही तख्त-ए-ताऊस (मयूर सिंहासन) की नक्काशीदार पीठिका।
दोहरे कंदूकार गुंबद एवं विशाल स्वतंत्र मीनारें:
- फारसी शैली से प्रेरित होकर फूले हुए या प्याज के आकार के दोहरे गुंबद बनाए गए, जिससे आंतरिक छत का अनुपात बाह्य भव्यता के साथ संतुलित रहे। मुख्य भवन के कोनों पर स्वतंत्र मीनारें खड़ी की गईं, जिनका झुकाव सुरक्षा की दृष्टि से हल्का बाहर की ओर रखा गया।
- उदाहरण: ताजमहल का मुख्य विशाल दोहरा गुंबद और चबूतरे के चारों कोनों पर खड़ी स्वतंत्र मीनारें, जो समग्र संरचना को पूर्ण संतुलन देती हैं।
- पर्णिल (Cusped) मेहराबों का प्रचलन: पूर्ववर्ती सादे नुकीले मेहराबों के स्थान पर 9 से 11 खांचों (पंखुड़ियों) वाले बहु-पर्णिल मेहराब बनाए गए, जो शाहजहाँ कालीन स्थापत्य की पहचान बने।
- उदाहरण: आगरा व दिल्ली के किलों के दीवान-ए-आम में बने संगमरमरी मेहराबी गलियारे।
- चारबाग विन्यास, बहता जल और फव्वारों का ज्यामितीय संतुलन: चारबाग विन्यास में जल-नहरों, फव्वारों और हौजों को इमारत के केंद्रीय अक्ष के साथ इस प्रकार जोड़ा गया कि संरचना को प्राकृतिक शीतलता के साथ-साथ जल में भवनों का आकर्षक प्रतिबिंब दिखाई दे।
- उदाहरण: लाहौर का शालीमार बाग और ताजमहल के सम्मुख निर्मित विस्तृत चारबाग उद्यान, जहाँ नहरों में ताजमहल का प्रतिबिंब विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है।
- ऊँचे चबूतरों पर निर्माण तथा पूर्ण द्विपक्षीय सममिति (Bilateral Symmetry): इमारतों को भूतल के स्थान पर ऊँचे मंच या चबूतरे (Plinth) पर स्थापित किया गया और केंद्रीय अक्ष के दोनों ओर हूबहू दर्पण-प्रतिबिंब जैसा सममित संतुलन रखा गया।
- उदाहरण: ताजमहल का मुख्य ढांचा एक विशाल और ऊँचे संगमरमरी चबूतरे पर स्थित है, जिसके पश्चिम में लाल बलुआ पत्थर की मस्जिद और पूर्व में संतुलन स्थापित करने के लिए ठीक वैसी ही इमारत (जवाब/मेहमानखाना) बनाई गई है।
- योजनाबद्ध नगर नियोजन, सुरक्षा प्राचीर व भव्य द्वार: स्मारकों के साथ-साथ मजबूत प्राचीरों, विशाल द्वारों और चौड़ी सड़कों से युक्त संपूर्ण सुनियोजित नगरों की स्थापना की गई।
- उदाहरण: शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) नगर की स्थापना, जिसके केंद्र में लाल बलुआ पत्थर से निर्मित लाल किला, विशाल जामा मस्जिद और मध्य में जलधारा युक्त नियोजित बाजार 'चांदनी चौक' का निर्माण कराया गया।
⇒ नींव में कुओं के वैज्ञानिक उपयोग जैसी उन्नत इंजीनियरिंग, संगमरमर का विलासितापूर्ण प्रयोग, अलंकृत स्तंभ, क़ुरान की आयतों का सुलेखन और स्थापत्य में सटीक सममिति के अभूतपूर्व समन्वय के कारण ही शाहजहाँ के काल को मुग़ल स्थापत्य कला का 'स्वर्णकाल' कहा जाता है।