उत्तर:
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भारत सरकार द्वारा कृषि उपजों के लिए घोषित एक पूर्व-निर्धारित मूल्य गारंटी है। यह बंपर उत्पादन अथवा बाजार में अत्यधिक मूल्य गिरावट की स्थिति में किसानों को संकटकालीन बिक्री से सुरक्षा प्रदान करता है। वर्तमान में यह एक प्रशासनिक नीतिगत निर्णय है, कोई वैधानिक (कानूनी) बाध्यता नहीं। बाजार भाव अधिक होने पर किसान अपनी उपज खुले बाजार में बेचने हेतु स्वतंत्र हैं, परंतु प्रतिकूल बाजार में सरकार तय MSP से कम मूल्य पर खरीद नहीं करती। सामान्यतः यह 23 फसलों (22 अनिवार्य फसलें + गन्ने हेतु FRP) पर लागू है।
MSP के प्रमुख उद्देश्य:
- किसानों को आय सुरक्षा: बाजार के मूल्य जोखिमों से सुरक्षित कर कृषकों की न्यूनतम आय व आजीविका सुनिश्चित करना।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का संचालन: भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए बफर स्टॉक व PDS हेतु पर्याप्त अनाज अधिप्राप्त करना।
- फसल प्रतिरूप (Crop Pattern) का नियमन: आवश्यकतानुसार दालों, तिलहनों व मोटे अनाजों को मूल्य समर्थन देकर प्रोत्साहित करना तथा अत्यधिक जल-गहन फसलों को हतोत्साहित करना।
- कृषि में पूँजी निवेश को बढ़ावा: सुनिश्चित प्रतिफल के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक व आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश हेतु प्रेरित करना।
CACP द्वारा MSP निर्धारण के प्रमुख कारक:
⇒ कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) संस्तुति देते समय व्यापक आर्थिक संतुलन को ध्यान में रखकर निम्नलिखित कारकों का विश्लेषण करता है:
- मांग एवं आपूर्ति की घरेलू व वैश्विक स्थिति।
- बाजार में मूल्य रुझान (Price Trends): घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित कीमतें।
- अन्य फसलों की कीमतें (Inter-crop Price Parity): ताकि एक फसल की ओर अत्यधिक झुकाव न हो।
- उपभोक्ता एवं मुद्रास्फीति पर प्रभाव: शहरी व गरीब उपभोक्ताओं पर जीवन-यापन लागत का दबाव।
- कृषि और गैर-कृषि व्यापार की शर्तें (Terms of Trade): कृषि आदानों व उत्पादों के बीच मूल्य अनुपात।
लागत पद्धतियाँ (Cost Concepts):
⇒ CACP मुख्य रूप से निम्नलिखित स्तरों पर उत्पादन लागत का आकलन करता है:
- A_2 लागत (प्रत्यक्ष लागत): बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, ईंधन, किराए की मशीनरी, गैर-पारिवारिक (किराए के) श्रम की मजदूरी और पट्टे पर ली गई भूमि का किराया आदि पर हुआ वास्तविक नकद व्यय।
- A_2 + FL लागत: A_2 लागत में परिवार के अवैतनिक सदस्यों के श्रम (Family Labour) का आकलित मूल्य जोड़कर।
(नोट: वर्तमान में केंद्र सरकार इसी A_2 + FL के 1.5 गुना (कम से कम 50% लाभ) के आधार पर MSP तय करती है।) - C_2 लागत (व्यापक लागत): इसमें A_2 + FL के साथ-साथ स्वयं की भूमि का किराया (Rent) और स्वयं की अचल पूँजी पर ब्याज को भी शामिल किया जाता है।
(तथ्यात्मक स्थिति: वर्तमान में वास्तविक MSP हमेशा C_2 से अधिक नहीं होती; इसी कारण स्वामीनाथन आयोग ने सिफारिश की थी कि MSP को C_2 का 1.5 गुना यानी C_2 + 50\% किया जाना चाहिए।) - C_3 लागत: C_2 लागत में 10% प्रबंधकीय लागत (Managerial Cost) को जोड़कर निकाला जाने वाला उच्चतम सैद्धांतिक स्तर।
निष्कर्ष:
⇒ MSP भारतीय कृषि की मूल्य स्थिरता और देश की खाद्य सुरक्षा का एक मजबूत आधार-स्तंभ है। वर्तमान व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने के लिए स्वामीनाथन आयोग की C_2 आधारित सिफारिशों पर विचार करने के साथ-साथ दलहन, तिलहन व मोटे अनाजों की खरीद अवसंरचना का विकेंद्रीकरण किया जाना समय की मांग है।