Menu

प्रश्न: "सिख धर्म का उदय केवल एक धार्मिक सुधार नहीं, बल्कि तत्कालीन मध्यकालीन समाज में एक गहरी सामाजिक क्रांति थी।" मध्यकालीन एवं आधुनिक भारतीय समाज पर सिख धर्म के सामाजिक प्रभावों का परीक्षण कीजिए। (10 अंक/150 शब्द) (UPSC/RAS)

Read in:

​उत्तर:

  • ​15वीं शताब्दी में सिख धर्म ने केवल धार्मिक रूढ़ियों का निवारण नहीं किया, बल्कि मध्यकालीन वर्ण-व्यवस्था, सामंतवाद और सामाजिक विषमताओं पर सीधी चोट कर एक समतामूलक सामाजिक क्रांति की नींव रखी।

​मध्यकालीन समाज पर प्रभाव:


  • ​जाति-प्रथा का उन्मूलन: गुरु नानक देव जी ने जन्म-आधारित सोपानक्रम को समाप्त कर समतावादी समाज की नींव रखी। उदाहरणस्वरूप, बिना भेदभाव सामूहिक भोजन की 'पंगत और लंगर' परंपरा स्थापित की।
  • ​लोकभाषा व बंधुत्व का विस्तार: गुरु अंगद देव जी ने ज्ञान पर विशिष्ट वर्ग के एकाधिकार को तोड़ा। उदाहरणस्वरूप, 'गुरुमुखी' लिपि को आमजन की भाषा बनाया और लंगर में व्यक्तिगत सेवा अनिवार्य की।
  • ​लैंगिक समता व सामाजिक संगठन: गुरु अमरदास जी ने सती और पर्दा प्रथा का कड़ा विरोध किया। उदाहरणस्वरूप, सामाजिक-धार्मिक प्रबंधन की 'मंजी प्रणाली' में महिलाओं को भी प्रचारक नियुक्त किया।
  • ​धार्मिक समन्वय व समरसता: गुरु रामदास जी व गुरु अर्जुन देव जी ने समाज में समावेशी संस्कृति रची। उदाहरणस्वरूप, गुरु रामदास जी द्वारा अमृतसर नगर बसाना तथा गुरु अर्जुन देव जी द्वारा स्वर्ण मंदिर की नींव सूफी संत मियां मीर से रखवाना व 'आदि ग्रंथ' में कबीर, रैदास और नामदेव जैसे संतों की वाणी संकलित करना।
  • ​अन्याय के विरुद्ध सशक्तिकरण: गुरु हरगोविंद जी ने कमजोर वर्गों में आत्मरक्षा और स्वाभिमान का संचार किया। उदाहरणस्वरूप, 'मीरी और पीरी' (सांसारिक व आध्यात्मिक शक्ति) के सिद्धांत और अकाल तख्त की स्थापना।
  • ​मानव सेवा व चिकित्सा सहायता: गुरु हर राय जी व गुरु हरकिशन जी ने निःस्वार्थ जनसेवा का आदर्श रखा। उदाहरणस्वरूप, गुरु हर राय जी द्वारा निःशुल्क औषधालय चलाना और गुरु हरकिशन जी द्वारा दिल्ली में चेचक-हैजा पीड़ितों की दिन-रात सेवा करना।
  • ​मानवाधिकार व धार्मिक स्वतंत्रता: गुरु तेग बहादुर जी ने दूसरे धर्मों की आस्था की रक्षा हेतु सर्वोच्च बलिदान दिया। उदाहरणस्वरूप, कश्मीरी पंडितों के धार्मिक अधिकारों हेतु दिल्ली के चांदनी चौक पर शीश समर्पित करना।
  • ​समतावादी खालसा समाज: गुरु गोविंद सिंह जी ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर शोषितों को 'संत-सिपाही' बनाया। उदाहरणस्वरूप, विभिन्न जातियों के 'पंज प्यारे' को अमृत छकाकर जन्म-आधारित भेदभाव का पूर्ण अंत किया।

​आधुनिक भारतीय समाज पर प्रभाव:


  • ​सार्वजनिक सेवा व आपदा प्रबंधन: गुरुद्वारों की सेवा परंपरा आज भी संकटों में सबसे बड़ी संबल है। उदाहरणस्वरूप, कोविड महामारी में 'ऑक्सीजन लंगर' और प्राकृतिक आपदाओं में 'खालसा एड' की सहायता।
  • ​शारीरिक श्रम का सम्मान: गुरु नानक देव जी के 'कीरत करो' सिद्धांत ने श्रम के प्रति हीनभावना मिटाई। उदाहरणस्वरूप, सभी वर्गों द्वारा गुरुद्वारों में सफाई व बर्तन माँजने की 'कार सेवा' करना।
  • ​संवैधानिक समानता का पोषण: सिख दर्शन के समतावादी मूल्य संविधान के अनुच्छेद 14-17 के आदर्शों को सुदृढ़ करते हैं। उदाहरणस्वरूप, जाति-विहीन सामूहिक पहचान हेतु 'सिंह' और 'कौर' उपनाम की परंपरा।
  • ​राष्ट्र-रक्षा व उद्यमिता: 'संत-सिपाही' की भावना ने देश की रक्षा और अर्थव्यवस्था को सशक्त किया। उदाहरणस्वरूप, भारतीय सेना की अग्रणी 'सिख रेजिमेंट' का अदम्य शौर्य और पंजाब में हरित क्रांति का नेतृत्व।
  • ​सिख गुरुओं ने आध्यात्मिकता को सामाजिक न्याय, मानव सेवा और समता से जोड़कर मध्यकालीन बंधनों को तोड़ा और आधुनिक भारत के लोकतांत्रिक व समरस ढांचे को सुदृढ़ आधार प्रदान किया।