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प्रश्न: भारत के प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट की पहचान करते हुए उनके संरक्षण हेतु सरकार द्वारा किए गए प्रमुख संस्थागत एवं नीतिगत प्रयासों का विस्तार से वर्णन कीजिए। (10 अंक/150 शब्द) (UPSC/RAS)

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उत्तर:

  • ​नॉर्मन मायर्स (1988) द्वारा प्रतिपादित 'जैव-विविधता हॉटस्पॉट' वे क्षेत्र हैं जहाँ न्यूनतम 1,500 संवहनी स्थानिक पादप प्रजातियाँ पाई जाती हैं तथा जिनका 70% से अधिक मूल प्राकृतिक आवास नष्ट हो चुका हो। 

वैश्विक स्तर पर 36 हॉटस्पॉट्स में से 4 क्षेत्र भारत में विस्तृत हैं:

  1. ​हिमालय क्षेत्र: इसमें संपूर्ण भारतीय हिमालयी भू-भाग (44.4% क्षेत्र) सहित नेपाल व भूटान आते हैं।
    → प्रमुख प्रजातियाँ: हिम तेंदुआ, नामदफा उड़न गिलहरी, कस्तूरी मृग और हंगुल।  
  2. ​पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका: सह्याद्रि श्रेणी के नाम से प्रसिद्ध, जिसका 64.9% भाग भारत में विस्तृत है।
    → प्रमुख प्रजातियाँ: लायन-टेल्ड मकाक, नीलगिरि तहर तथा मालाबार सीवेट।  
  3. ​इंडो-बर्मा क्षेत्र: भारत का पूर्वोत्तर भाग (असम, अरुणाचल प्रदेश आदि; लगभग 5%)।
    → प्रमुख प्रजातियाँ: कछुओं की दुर्लभ प्रजातियाँ, लंगूर व वानर (कपि)।  
  4. ​सुंडालैंड: भारत का अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (1.28%) तथा दक्षिण-पूर्व एशिया (सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया आदि)।
    → प्रमुख प्रजातियाँ: डुगोंग (समुद्री गाय), समुद्री मगरमच्छ तथा ऑलिव रिडले कछुए।  

​संरक्षण हेतु सरकार के प्रयास

​1. संस्थागत प्रयास (त्रि-स्तरीय ढांचा)

  • ​राष्ट्रीय स्तर: 2003 में स्थापित राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA, चेन्नई), जो जैविक संसाधनों तक पहुँच और उचित लाभ साझाकरण (ABS) को विनियमित करता है।  
  • ​राज्य स्तर: प्रत्येक राज्य में राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) की स्थापना।  
  • ​स्थानीय स्तर: पंचायती और नगर निकाय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC) का गठन तथा लोक जैव विविधता रजिस्टर (PBR) का निर्माण।  
  • ​विशेष एजेंसियां: वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)।

​2. नीतिगत एवं कानूनी प्रयास

  • ​जैविक विविधता अधिनियम, 2002: संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता अभिसमय (CBD) के उद्देश्यों को लागू करने तथा अवैध दोहन रोकने हेतु।  
  • ​वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व की स्थापना एवं जीवों के शिकार पर प्रतिबंध।  
  • ​पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 व राष्ट्रीय पर्यावरण नीति, 2006: पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESZ) की अधिसूचना तथा विकास व पर्यावरण में संतुलन।  
  • ​प्रजाति-विशिष्ट योजनाएं: प्रोजेक्ट टाइगर (1973), प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992), प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड और सिक्योर हिमालय जैसी योजनाएँ।  

⇒ ​इन समग्र प्रयासों के माध्यम से भारत अपने समृद्ध हॉटस्पॉट क्षेत्रों के संकटग्रस्त आवासों व दुर्लभ जीवों का प्रभावी इन-सीटू (स्व-स्थाने) संरक्षण सुनिश्चित कर रहा है।