Menu

प्रश्न: शाहजहाँ के काल को मुगल वास्तुकला का 'स्वर्ण युग' क्यों कहा जाता है? मुगल चित्रकला की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (150 शब्द) (UPSC/RAS)

Read in:

उत्तर:

  • शाहजहाँ के शासनकाल (1628–1658 ई.) में मुगल साम्राज्य आर्थिक समृद्धि के दौर में था। कृषि से प्राप्त राजस्व, व्यापार और शाही खजाने की सम्पन्नता के कारण शाहजहाँ बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य करवा सका। इस काल में मुगल वास्तुकला ने सौंदर्य, भव्यता और कलात्मकता का चरम स्तर प्राप्त किया।

शाहजहाँ कालीन वास्तुकला की प्रमुख विशेषताएँ

  • संगमरमर का अधिक प्रयोग – लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर सफेद संगमरमर को प्राथमिकता दी गई। (ताजमहल, आगरा)
  • सममिति एवं संतुलन – भवनों की बनावट में दोनों ओर समानता और ज्यामितीय संतुलन रखा गया। (ताजमहल)
  • विशाल गुंबद एवं मीनारें – ऊँचे गुंबदों, मीनारों और आकर्षक मेहराबों का प्रयोग हुआ। (ताजमहल, जामा मस्जिद)
  • जल एवं उद्यान व्यवस्था – चारबाग शैली, फव्वारों, नहरों और जलधाराओं से भवनों की सुंदरता बढ़ाई गई। (ताजमहल का उद्यान, शालीमार बाग)
  • पच्चीकारी एवं सजावट – संगमरमर पर रंगीन पत्थरों की जड़ाई (Pietra Dura), पुष्प आकृतियों और कुरान की आयतों का प्रयोग हुआ। (ताजमहल)
  • महलों की भव्यता – दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास और सुंदर महलों का निर्माण हुआ। (दिल्ली का लाल किला)

मुगल चित्रकला की प्रमुख विशेषताएँ

  • दरबारी जीवन का चित्रण – सम्राट, दरबार और शाही समारोहों को विषय बनाया गया। (पादशाहनामा के दरबारी दृश्य)
  • यथार्थवादी व्यक्तिचित्रण – शासकों एवं दरबारियों के चेहरे और हाव-भाव का सजीव चित्रण। (शाहजहाँ का व्यक्तिचित्र)
  • प्रकृति एवं पशु-पक्षी चित्रण – फूलों, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों का सूक्ष्म अंकन। (पादशाहनामा के प्रकृति एवं पशु-पक्षी संबंधी चित्र)
  • सूक्ष्म रेखांकन एवं रंग संयोजन – बारीक रेखाओं, चमकीले रंगों और स्वर्णिम सजावट का प्रयोग। (शाहजहाँकालीन लघुचित्र)
  • फारसी एवं यूरोपीय प्रभाव – फारसी शैली के साथ यूरोपीय छाया-प्रकाश और परिप्रेक्ष्य का प्रभाव। (शाहजहाँकालीन दरबारी लघुचित्र)

निष्कर्ष:

  • शाहजहाँ के काल में मुगल वास्तुकला ने भव्यता का शिखर प्राप्त किया, जबकि चित्रकला में जहाँगीर काल की यथार्थवादी परंपरा को आगे बढ़ाया गया।