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BOHR उपग्रह (Betavoltaic Orbital High-Reliability) (UPSC/RAS/PSI)

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  • स्पेसएक्स (SpaceX) ने 7–8 जुलाई 2026 को अपने Transporter-17 Rideshare Mission के तहत दुनिया का पहला कमर्शियल न्यूक्लियर-पावर्ड सैटेलाइट ‘BOHR’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
  • इसे Falcon 9 रॉकेट द्वारा Vandenberg Space Force Base, California (USA) से प्रक्षेपित किया गया।
  • विकसितकर्ता: City Labs Inc., Florida, USA
  • लॉन्च करने वाली कंपनी: SpaceX
  • BOHR: BOHR एक प्रायोगिक वाणिज्यिक उपग्रह है, जिसे अंतरिक्ष में बीटावोल्टेइक ऊर्जा तकनीक के प्रदर्शन के लिए विकसित किया गया है।
  • यह पारंपरिक सौर ऊर्जा आधारित उपग्रहों के विकल्प के रूप में दीर्घकालिक और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत की क्षमता का परीक्षण करता है।

बीटावोल्टेइक तकनीक -

  • यह एक प्रकार की परमाणु बैटरी (Nuclear Battery) है।
  • इसमें ट्रिटियम (Tritium) के रेडियोधर्मी क्षय से निकलने वाले बीटा कणों को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।

कार्य प्रणाली:

  • ट्रिटियम का क्षय → बीटा कणों का उत्सर्जन → अर्धचालक द्वारा अवशोषण → विद्युत ऊर्जा उत्पादन
  • इसमें परमाणु विखंडन नहीं होता।
  • इसमें श्रृंखला अभिक्रिया  नहीं होती।

BOHR मिशन का उद्देश्य

  1. अंतरिक्ष में लंबे समय तक लगातार बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता का प्रदर्शन।
  2. सूर्य के प्रकाश पर निर्भरता कम करना।
  3. बिना बड़े बैटरी बैकअप के छोटे लेकिन लंबे समय तक चलने वाले ऊर्जा स्रोत का परीक्षण।

महत्व

1. Deep Space Exploration

  • सूर्य से दूर स्थित क्षेत्रों में उपयोगी हो सकता है, जहां सौर ऊर्जा कमजोर होती है।
  • भविष्य के मंगल मिशन,चंद्र मिशन,बाहरी ग्रहों के मिशन में उपयोगी।

2. चंद्रमा के छाया वाले क्षेत्र

  • चंद्रमा के स्थायी छाया वाले क्षेत्रों (Permanently Shadowed Regions) में ऊर्जा उपलब्ध कराने की संभावना।

3. वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र

  • निजी कंपनियों द्वारा नई अंतरिक्ष ऊर्जा तकनीकों के विकास को बढ़ावा।

बीटावोल्टेइक बैटरी की विशेषताएँ

  1. लंबी परिचालन अवधि।
  2. रखरखाव मुक्त।
  3. छोटा एवं हल्का आकार।
  4. सूर्य के प्रकाश के बिना भी कार्य करने की क्षमता।
  5. उच्च विश्वसनीयता।

चुनौतियाँ

  1. कम शक्ति उत्पादन।
  2. उच्च विकास लागत।
  3. रेडियोधर्मी पदार्थों से जुड़े सुरक्षा एवं नियामकीय मुद्दे।
  4. बड़े अंतरिक्ष यानों के लिए अभी सीमित उपयोग।

भारत के लिए महत्व

  • भारत के भविष्य के मिशनों में यह तकनीक उपयोगी हो सकती है:
  1. उन्नत चंद्रयान मिशन
  2. मंगल अन्वेषण मिशन
  3. गहरे अंतरिक्ष मिशन
  4. दीर्घकालिक वैज्ञानिक उपग्रह