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सेमीकॉन 2.0 (Semicon 2.0) (UPSC/RAS/PSI)

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  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय के साथ सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य भारत में समग्र सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का विकास करना है।
  • स्वीकृति: केंद्रीय मंत्रिमंडल
  • कुल बजट: ₹1,27,500 करोड़
  • उद्देश्य: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन एवं विनिर्माण केंद्र बनाना।
  • आधार: सेमीकॉन 1.0 की उपलब्धियों को आगे बढ़ाना।

सेमीकॉन 2.0 के छह स्तंभ

  1.  डिजाइन (Design): चिप डिज़ाइन, IP (Intellectual Property) एवं डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करना।
  2.  मशीनें एवं सामग्री: सेमीकंडक्टर निर्माण हेतु मशीनों, रसायनों, गैसों एवं सामग्रियों के स्वदेशी विकास को बढ़ावा।
  3.  फैब (Fab) स्थापना: सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब एवं डिस्प्ले फैब की स्थापना को प्रोत्साहन।
  4.  ATMP/OSAT: उन्नत पैकेजिंग एवं परीक्षण (Assembly, Testing, Marking & Packaging / Outsourced Semiconductor Assembly and Test) क्षमताओं का विस्तार।
  5.  अनुसंधान एवं विकास (R&D): उन्नत नोड्स एवं नई सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों का विकास।
  6.  प्रतिभा विकास: विश्वविद्यालयों एवं उद्योगों के सहयोग से कुशल मानव संसाधन तैयार करना।

ISM 1.0 की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • 12 विनिर्माण इकाइयों को स्वीकृति।
  • कुल निवेश: ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक।
  • 3 कंपनियाँ (Micron, Kaynes, CG Semi) ने वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया।
  • 105 स्टार्टअप/MSME को EDA (Electronic Design Automation) टूल उपलब्ध कराए गए।
  • 24 सेमीकंडक्टर डिज़ाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता।
  • 315 विश्वविद्यालयों में सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण; 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

महत्व

  • आत्मनिर्भर भारत एवं मेक इन इंडिया को गति।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, AI, रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्रों को बढ़ावा।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भारत की भागीदारी मजबूत होगी।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा एवं तकनीकी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करेगा।