उत्तर:
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय के निम्नलिखित प्रकार दिए गए हैं–
(i) सामाजिक न्याय –
- एक ऐसा समाज जिसमें धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान, भाषा, रंग, उम्र, लैंगिक रुझान आदि के आधार पर भेदभाव नहीं हो।
- समाज में समानता हो तथा समाज सामाजिक रूढ़ियों, परम्पराओं, अंधविश्वासों, आडम्बरों आदि से मुक्त हो।
- व्यक्ति को विकास हेतु स्वच्छ व स्वतंत्र वातावरण उपलब्ध हो।
(ii) आर्थिक न्याय –
- संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण (योग्यता के आधार पर वितरण, किंतु साथ ही वंचित व कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान)।
- सभी लोगों को रोजगार उपलब्ध हो, आर्थिक शोषण का अभाव हो, न्यूनतम मजदूरी दरें निर्धारित हों, सभी की बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी हों, धन व उत्पादन के साधनों का अहितकारी संकेन्द्रण न हो।
(iii) राजनीतिक न्याय –
- सभी नागरिकों को मतदान करने व चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता हो।
- निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव प्रणाली हो।
- चुनावों में धनबल, बाहुबल, जातिवाद, क्षेत्रवाद व साम्प्रदायिकता आदि का प्रयोग ना हो।
- चुनाव विकास के मुद्दों पर सम्पन्न हों।
⇒ भारतीय संविधान में सामाजिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु नागरिकों को मौलिक अधिकार(अनु. 12-35) तथा आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु DPSP(अनु. 36-51) का प्रावधान किया गया है।