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​प्रश्न: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में वर्णित 'न्याय' (Justice) के विभिन्न रूपों को संक्षिप्त में समझाइए। (50 Words) (RAS)

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​उत्तर:

  • ​भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय के निम्नलिखित प्रकार दिए गए हैं–

​(i) सामाजिक न्याय –

  1. ​एक ऐसा समाज जिसमें धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान, भाषा, रंग, उम्र, लैंगिक रुझान आदि के आधार पर भेदभाव नहीं हो।
  2. ​समाज में समानता हो तथा समाज सामाजिक रूढ़ियों, परम्पराओं, अंधविश्वासों, आडम्बरों आदि से मुक्त हो।
  3. ​व्यक्ति को विकास हेतु स्वच्छ व स्वतंत्र वातावरण उपलब्ध हो।

​(ii) आर्थिक न्याय –

  1. ​संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण (योग्यता के आधार पर वितरण, किंतु साथ ही वंचित व कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान)।
  2. सभी लोगों को रोजगार उपलब्ध हो, आर्थिक शोषण का अभाव हो, न्यूनतम मजदूरी दरें निर्धारित हों, सभी की बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी हों, धन व उत्पादन के साधनों का अहितकारी संकेन्द्रण न हो।

​(iii) राजनीतिक न्याय –

  1. ​सभी नागरिकों को मतदान करने व चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता हो।
  2. ​निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव प्रणाली हो।
  3. ​चुनावों में धनबल, बाहुबल, जातिवाद, क्षेत्रवाद व साम्प्रदायिकता आदि का प्रयोग ना हो।
  4. ​चुनाव विकास के मुद्दों पर सम्पन्न हों।

⇒ भारतीय संविधान में सामाजिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु नागरिकों को मौलिक अधिकार(अनु. 12-35) तथा आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु DPSP(अनु. 36-51) का प्रावधान किया गया है।