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स्पिरुलिना से स्वदेशी C-फाइकोसायनिन (C-Phycocyanin) उत्पादन तकनीक का व्यावसायीकरण (UPSC/RAS/PSI)

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(Science & Technology | Biotechnology | Bioeconomy | Environment | UPSC GS-3 | Prelims + Mains)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने हैदराबाद स्थित KN Biosciences (India) Pvt. Ltd. को स्पिरुलिना (Spirulina) से C-फाइकोसायनिन (C-Phycocyanin) के स्वदेशी उत्पादन एवं व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह तकनीक IIT गुवाहाटी द्वारा विकसित की गई है।

प्रमुख बिंदु

  • TDB ने परियोजना को वित्तीय सहायता दी।
  • तकनीक IIT गुवाहाटी द्वारा विकसित की गई।
  • स्पिरुलिना (NCIM 5143 स्ट्रेन) का उपयोग किया गया।
  • कंपनी को Technology Transfer (ToT) के माध्यम से तकनीक हस्तांतरित की गई।
  • लक्ष्य—प्राकृतिक नीले रंगद्रव्य C-फाइकोसायनिन का स्वदेशी उत्पादन।
  • उद्देश्य—आयात पर निर्भरता कम करना तथा आत्मनिर्भर भारत और जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) को बढ़ावा देना।

C-फाइकोसायनिन (C-Phycocyanin) क्या है?

  • C-फाइकोसायनिन एक प्राकृतिक नीला रंगद्रव्य (Natural Blue Pigment) तथा प्रोटीन है, जो मुख्यतः स्पिरुलिना (नील-हरित शैवाल/सायनोबैक्टीरिया) से प्राप्त होता है।

प्रमुख विशेषताएँ


  • प्राकृतिक नीला रंग
  • जल में घुलनशील (Water Soluble)
  • शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट
  • खाद्य-ग्रेड एवं औषधीय उपयोग के लिए उपयुक्त
  • कृत्रिम रंगों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प

स्पिरुलिना (Spirulina) क्या है?

  • स्पिरुलिना एक सायनोबैक्टीरिया (Blue-Green Algae) है, जिसे पोषक तत्वों से भरपूर सुपरफूड माना जाता है।

विशेषताएँ

  • उच्च प्रोटीन (लगभग 60–70%)
  • विटामिन एवं खनिजों से भरपूर
  • तीव्र वृद्धि
  • कम संसाधनों में उत्पादन
  • कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करने में सक्षम

तकनीक कैसे कार्य करती है?


1. अपस्ट्रीम (Upstream) प्रक्रिया

  • नियंत्रित प्रकाश एवं पोषक तत्वों में स्पिरुलिना का संवर्धन।
  • उच्च घनत्व वाला जैवभार (Biomass) तैयार किया जाता है।

2. डाउनस्ट्रीम (Downstream) प्रक्रिया

  • विलायक-मुक्त (Solvent-Free) निष्कर्षण।
  • एकल-चरण (Single-Step) शुद्धिकरण।
  • उच्च शुद्धता वाला C-फाइकोसायनिन प्राप्त किया जाता है।

इस तकनीक की विशेषताएँ

  • हरित (Green) तकनीक
  • रसायनों का न्यूनतम उपयोग
  • पर्यावरण-अनुकूल
  • उच्च शुद्धता वाला उत्पाद
  • अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप
  • कम लागत पर उत्पादन की संभावना

C-फाइकोसायनिन के उपयोग


1. खाद्य उद्योग

  • प्राकृतिक खाद्य रंग
  • पेय पदार्थ
  • मिठाइयाँ
  • डेयरी उत्पाद

2. न्यूट्रास्यूटिकल्स

  • स्वास्थ्य पूरक (Health Supplements)
  • एंटीऑक्सीडेंट उत्पाद

3. औषधि

  • सूजनरोधी (Anti-inflammatory)
  • प्रतिरक्षा समर्थन

4. कृषि

  • जैव-उत्तेजक (Biostimulant)
  • पौधों की वृद्धि

5. मत्स्य पालन एवं पोल्ट्री

  • चारा अनुपूरक
  • रंग एवं पोषण सुधार

6. सौंदर्य प्रसाधन

  • प्राकृतिक कॉस्मेटिक उत्पाद

परियोजना का महत्व


  1.  आयात प्रतिस्थापन: प्राकृतिक रंगों के आयात पर निर्भरता घटेगी।
  2.  जैव-अर्थव्यवस्था: भारत की Bioeconomy को गति मिलेगी।
  3.  आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी जैव-प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिलेगा।
  4.  हरित विनिर्माण: पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया विकसित होगी।
  5.  रोजगार: जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग में नए रोजगार अवसर बढ़ेंगे।
  6.  वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत प्राकृतिक जैव-उत्पादों के वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।

संबंधित संस्थान

  • प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB)
  • स्थापना: 1996
  • मंत्रालय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)
  • उद्देश्य: स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • IIT गुवाहाटी
  • तकनीक विकसित करने वाला संस्थान।
  • स्वदेशी स्पिरुलिना स्ट्रेन (NCIM 5143) का उपयोग।

परीक्षा की दृष्टि से तथ्य (Prelims Facts)


तथ्य विवरण

  • तकनीक: स्पिरुलिना से C-फाइकोसायनिन उत्पादन
  • विकसित संस्थान: IIT गुवाहाटी
  • वित्तीय सहायता: Technology Development Board (TDB)
  • लाभार्थी कंपनी: KN Biosciences (India) Pvt. Ltd., हैदराबाद
  • जैव स्रोत: स्पिरुलिना (NCIM 5143)
  • उत्पाद: प्राकृतिक नीला रंगद्रव्य (C-Phycocyanin)
  • उपयोग: खाद्य, औषधि, कृषि, मत्स्य, पोल्ट्री, न्यूट्रास्यूटिकल्स

Exam Booster Facts

  • Spirulina एक सायनोबैक्टीरिया है, शैवाल नहीं।
  • C-Phycocyanin प्राकृतिक नीला रंगद्रव्य है।
  • ToT (Technology Transfer) का अर्थ है विकसित तकनीक को उद्योग को व्यावसायिक उपयोग हेतु हस्तांतरित करना।
  • Bioeconomy में जैविक संसाधनों से उत्पाद एवं सेवाएँ विकसित की जाती हैं।

संभावित प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) प्रश्न

प्रश्न 1. हाल ही में चर्चा में रहा C-फाइकोसायनिन (C-Phycocyanin) क्या है?

(a) कृत्रिम खाद्य रंग

(b) स्पिरुलिना से प्राप्त प्राकृतिक नीला रंगद्रव्य

(c) एक प्रतिजैविक

(d) एक जैव ईंधन

उत्तर: (b)

प्रश्न 2. स्पिरुलिना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

  1. यह सायनोबैक्टीरिया है।
  2. इसका उपयोग C-फाइकोसायनिन उत्पादन में किया जाता है।
  3. यह उच्च प्रोटीन युक्त जैव संसाधन है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 1 और 2

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

संभावित मुख्य परीक्षा (Mains) प्रश्न

Q.)"जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) को सुदृढ़ बनाने में स्वदेशी जैव-प्रौद्योगिकियों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए। स्पिरुलिना आधारित C-फाइकोसायनिन उत्पादन तकनीक के संदर्भ में आत्मनिर्भर भारत एवं हरित विनिर्माण की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए।" (150 शब्द)

स्रोत: PIB (Press Information Bureau), भारत सरकार
प्रविष्टि तिथि: 16 जुलाई 2026
विषय: Technology Development Board (DST) supports commercialisation of indigenous C-Phycocyanin production technology from Spirulina