उत्तर:
- अनुच्छेद 243K और 243ZA, तथा पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के तहत कार्य करते हुए, राज्य निर्वाचन आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष स्थानीय निकाय चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्य करता है।
1. मतदाता सूची तैयार करना और प्रबंधन
- पंचायती राज और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करता है और समय-समय पर अद्यतन (अपडेट) करता है [अनुच्छेद 243K (1)]।
- फोटो-युक्त पहचान पत्र और सटीक मतदाता सूची बनाए रखना सुनिश्चित करता है।
2. चुनाव का संचालन और पर्यवेक्षण
- चुनाव की तारीखों और चरणों की घोषणा करता है, तथा मतदान कार्यक्रम जारी करता है।
- संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया पर अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण रखता है [अनुच्छेद 243K (1), 243ZA]।
- पर्यवेक्षण के लिए चुनाव अधिकारियों और जोनल/सेक्टर मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति करता है।
3. चुनावी अनुशासन का प्रवर्तन
- जिला प्रशासन की सहायता से आदर्श आचार संहिता लागू करता है।
- चुनाव चिन्हों का आवंटन करता है और संबंधित विवादों का निपटारा करता है (ग्राम पंचायत चुनावों में दलीय प्रतीकों का उपयोग नहीं किया जाता है)।
4. आकस्मिक परिस्थितियों का निपटान
- विशेष परिस्थितियों में चुनाव स्थगित या रद्द कर सकता है।
- जहां कार्यकाल के छह महीने से अधिक शेष हों, वहां उप-चुनाव आयोजित करता है।
5. मतदाता सुविधाएं
- यह सुनिश्चित करता है कि मतदान केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं हों: पीने का पानी, शौचालय, दिव्यांगजनों के लिए रैंप।
- मतदाता शिक्षा और भागीदारी के लिए 'स्वीप' (SVEEP) कार्यक्रम चलाता है।
- 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए 'पोस्टल बडी पोर्टल' (Postal Buddy Portal) के तहत घर से मतदान के लिए डाक मतपत्र (Postal Ballot) की सुविधा प्रदान करता है।
6. सलाहकार और सुधार कार्य
- ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के लिए सीटों के आवंटन सहित आरक्षण मामलों पर राज्य सरकार को सलाह देता है।
- चुनाव सुधार और नवाचार जैसे EVM को शुरू करता है।