उत्तर:
संवैधानिक संरचना
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष के लिए एक संवैधानिक एवं अर्द्ध-न्यायिक निकाय के रूप में वित्त आयोग का गठन किया जाता है। इसमें एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं।
सदस्यों की अर्हताएं (वित्त आयोग अधिनियम, 1951 के अनुसार)
- अध्यक्ष: सार्वजनिक मामलों का पर्याप्त अनुभव रखने वाला व्यक्ति।
- चार सदस्य:
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखने वाला व्यक्ति।
- सरकार के वित्त एवं लेखा (Accounts) का विशेष ज्ञान रखने वाला।
- वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों का व्यापक अनुभवी व्यक्ति।
- अर्थशास्त्र का विशेष ज्ञाता।
राजकोषीय असंतुलन निवारण में भूमिका
- ऊर्ध्वाधर असंतुलन (Vertical Imbalance): केंद्र की अधिक कर संग्रहण शक्ति और राज्यों के भारी सामाजिक-विकासात्मक व्यय उत्तरदायित्वों के बीच की खाई को पाटना। 16वें वित्त आयोग ने विभाज्य कर पूल (Divisible Pool) का 41% हिस्सा राज्यों को देने की सिफारिश की।
- क्षैतिज असंतुलन (Horizontal Imbalance): विभिन्न राज्यों के मध्य आय, प्राकृतिक संसाधन और राजस्व क्षमता की असमानता को कम कर सभी नागरिकों को बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराना।
कर-हस्तांतरण के आर्थिक मानदंड (16वां वित्त आयोग)
राज्यों के बीच कर विभाजन के लिए 6 प्रमुख वस्तुनिष्ठ मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
- आय अंतर (Income Distance) – 42.5%: उच्चतम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्य से अंतर, जो वित्तीय समता बढ़ाता है।
- क्षेत्रफल (Area) – 10%: प्रशासनिक एवं आधारभूत लागत की पूर्ति हेतु।
- जनसंख्या (2011) – 17.5%: नागरिकों की वास्तविक सेवा आवश्यकताओं हेतु।
- जनसांख्यिकीय प्रदर्शन – 10%: जनसंख्या नियंत्रण (TFR) में बेहतर प्रयास करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन।
- वन एवं पारिस्थितिकी – 10%: घने जंगलों के संरक्षण व पर्यावरणीय योगदान हेतु।
- GDP में योगदान-10 %
सहायता अनुदान (अनुच्छेद 275)
- कर वितरण के उपरांत भी शेष रह जाने वाले वित्तीय अंतर को पाटने के लिए आयोग राजस्व घाटा अनुदान (PDRD), स्थानीय निकायों (पंचायती राज व शहरी निकाय) को शर्त रहित अनुदान, तथा आपदा प्रबंधन (SDRF/NDRF) हेतु विशिष्ट वित्तीय आवंटन सुनिश्चित करता है।
- वित्त आयोग संसाधनों के समतामूलक और पारदर्शी वितरण द्वारा भारतीय सहकारी संघवाद के 'संतुलन चक्र' की भूमिका निभाता है।