उत्तर:
परिचय:
- सवाई जयसिंह द्वितीय (1700–1743 ई.) आमेर के कछवाहा शासक थे। वे कूटनीति, प्रशासन, नगर-नियोजन, विज्ञान एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध रहे।
1. राजनीतिक उपलब्धियाँ
- ‘सवाई’ की उपाधि — औरंगजेब ने जयसिंह को ‘सवाई’ की उपाधि प्रदान की।
- मुगल संबंध — उन्होंने 7 मुगल बादशाहों के शासनकाल में राजनीतिक भूमिका निभाई।
- उत्तराधिकार संघर्ष — मुगल उत्तराधिकार संघर्ष में आजम का समर्थन किया, किंतु आजम की पराजय के बाद परिस्थितियों के अनुसार नीति बदली।
- देवराई समझौता (1708 ई.) — इसके माध्यम से आमेर पर अधिकार के लिए सवाई जयसिंह को समर्थन का आश्वासन मिला।
- सांभर युद्ध (1709 ई.) — आमेर एवं मारवाड़ की संयुक्त सेना ने मुगल सेनापति सैयद खान को पराजित कर आमेर पर पुनः अधिकार प्राप्त किया।
- भरतपुर एवं बूंदी की राजनीति — भरतपुर में मोहकम सिंह के विरुद्ध बदन सिंह तथा बूंदी में उम्मेद सिंह के विरुद्ध दलेल सिंह का समर्थन कर क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
- मालवा का सूबेदार — सवाई जयसिंह को तीन बार मालवा का मुगल गवर्नर बनाया गया।
- मराठों से संघर्ष —
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- पिलसूद का युद्ध (1715) → विजय
- मंदसौर का युद्ध (1733) → पराजय
- रामपुरा का युद्ध (1735) → पराजय
- हुरड़ा सम्मेलन (1734) — मराठों की बढ़ती शक्ति के विरुद्ध राजपूत राज्यों की सामूहिक शक्ति संगठित करने का प्रयास किया।
- जयपुर की स्थापना (1727) — आमेर से नई राजधानी जयपुर स्थानांतरित कर एक योजनाबद्ध एवं सुदृढ़ राजनीतिक केंद्र स्थापित किया।
2. कला, संस्कृति एवं विज्ञान में योगदान
- जयपुर नगर — विद्याधर भट्टाचार्य की सहायता से 9-वर्गीय योजना के आधार पर जयपुर का निर्माण कराया।
- जंतर-मंतर — दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी, जयपुर एवं मथुरा में 5 वेधशालाओं का निर्माण कराया; जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा है।
- खगोल विज्ञान — 1725–33 ई. के मध्य ‘जिज-ए-मुहम्मदशाही’ नामक नक्षत्र सारणी तैयार कराई।
- साहित्य संरक्षण — ‘जयसिंहकारिका’ जैसे ग्रंथों की रचना को प्रोत्साहन दिया।
- विद्वानों का संरक्षण — पंडित जगन्नाथ, पुंडरीक रत्नाकर आदि विद्वानों को संरक्षण दिया।
- यूरोपीय वैज्ञानिकों का सहयोग — आंद्रे स्ट्रॉहल, एंटोनी गैलेस परगावे तथा क्लाड बोडियर जैसे यूरोपीय खगोलविदों से ज्ञान प्राप्त किया।
- स्थापत्य — सिटी पैलेस/चन्द्रमहल, नाहरगढ़, जलमहल, सिसोदिया रानी का महल आदि निर्माण कार्यों को प्रोत्साहन।
- गोविंद देवजी मंदिर — वैष्णव/गौड़ीय परंपरा के इस प्रमुख मंदिर को संरक्षण दिया।
- चित्रकला — ‘सूरतखाना’ नामक चित्रकला विभाग की स्थापना; साहिबराम एवं मुहम्मदशाह जैसे चित्रकारों को संरक्षण।
- सामाजिक सुधार — सती एवं बाल-विवाह पर नियंत्रण, विवाह एवं श्राद्ध के अत्यधिक खर्च को सीमित करने तथा विधवा-विवाह एवं अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देने के प्रयास किए।
निष्कर्ष
- इस प्रकार सवाई जयसिंह द्वितीय ने कूटनीति से आमेर-जयपुर की राजनीतिक शक्ति मजबूत की तथा विज्ञान, स्थापत्य, साहित्य, चित्रकला एवं सामाजिक सुधारों को प्रोत्साहन दिया। उनका व्यक्तित्व मध्यकालीन राजस्थान में राजनीति और संस्कृति के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।