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प्रश्न: "क्वाड एक अनौपचारिक समूह से बदलकर भारत की हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) नीति का एक मुख्य आधार बन चुका है।" इस कथन के आधार पर, क्वाड के मुख्य लक्ष्यों की चर्चा करें और भारत की विदेश नीति के लिए इसके महत्व को स्पष्ट करें। (UPSC/RAS)

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उत्तर:

भारत, अमेरिकाजापान और ऑस्ट्रेलिया का यह समूह 2007 में एक सामान्य चर्चा मंच के रूप में शुरू हुआ था। 2017 में पुनर्जीवित होने के बाद यह आपदा प्रबंधन के सीमित दायरे से बाहर निकलकर शीर्ष नेताओं के एक मजबूत मंच में बदल चुका है। आज यह सुरक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहा है और एक स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है।

क्वाड के मुख्य उद्देश्य

  1. खुला और नियम-आधारित हिंद-प्रशांतः समुद्र और आकाश में स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय नियमों (विशेषकर UNCLOS) का पालन कराना। इसका लक्ष्य है कि विवादों को दबाव के बजाय बातचीत से सुलझाया जाए और कोई भी देश मनमाने ढंग से नियम न बदले।
  2. मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी विकासः सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ और जरूरी खनिजों के लिए किसी एक देश पर निर्भरता घटाना। इसके साथ ही AI, 5G और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों में मिलकर काम करना।
  3. पारदर्शी इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी: इंडो-पैसिफिक इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनरशिप जैसी पहलों के माध्यम से देशों को कर्ज के जाल से बचाने वाले, पारदर्शी और टिकाऊ विकास विकल्प प्रदान करना।
  4. समुद्री सुरक्षा और जलवायु सहयोगः अवैध रूप से मछली पकड़ने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रियल टाइम डेटा साझा करना। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा (हाइड्रोजन), आपदा प्रबंधन और जलवायु-सुरक्षित ढांचे पर काम करना।
  5. स्वास्थ्य सुरक्षाः कोविड-19 के दौरान शुरू की गई क्वाड वैक्सीन पहल की तरह, वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए टीकों के निर्माण और वितरण को बढ़ावा देना।
  6. क्षेत्रीय संतुलन और संप्रभुताः बिना किसी देश का नाम लिए सभी राष्ट्रों की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करना, जिससे क्षेत्र में किसी एक ताकत का वर्चस्व न कायम हो सके।
  7. आर्थिक सहयोग और निष्पक्ष व्यापारः आर्थिक दबाव की नीतियों का विरोध करते हुए सदस्यों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना, जिससे आर्थिक और सुरक्षा संबंध साथ-साथ मजबूत हो सकें।

भारत की विदेश नीति के लिए महत्व


  1. बिना गठबंधन के मजबूत साझेदारीः क्वाड भारत को किसी सैन्य गुट में शामिल हुए बिना प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के साथ जुड़ने का मौका देता है। इससे भारत अपनी स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता (रणनीतिक स्वायत्तता) बनाए रखता है।
  2. चीन का संतुलन और बहुध्रुवीय व्यवस्थाः यह भारत को हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव का सामूहिक जवाब देने का मंच देता है। यह भारत के उस विजन को समर्थन देता है जहाँ पूरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र बहुध्रुवीय रहे।
  3. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता कदः दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ बराबरी के स्तर पर जुड़ने से भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ता है। यह भारत को एक संतुलन बनाने वाले देश से आगे बढ़ाकर एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनाता है।
  4. 'एक्ट ईस्ट' और पड़ोस नीति को मजबूती: जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ नजदीकी समन्वय से भारत का दक्षिण-पूर्व एशिया (आसियान) और अपने आसपास के पड़ोसी देशों के साथ जुड़ाव और गहरा होता है।
  5. तकनीक और विदेशी निवेश का लाभः सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग से भारत के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बड़ा सहारा मिलता है।
  6. समुद्री रक्षा क्षमताओं में वृद्धिः मालाबार जैसे नौसैनिक अभ्यासों और रसद (लॉजिस्टिक्स) समझौतों से भारत की नौसेना अधिक सक्षम होती है, जिससे अपनी समुद्री सीमाओं और व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा आसान हो जाती है।
  7. हिंद-प्रशांत का केंद्र बननाः वैश्विक राजनीति और व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र (हिंद-प्रशांत) में भारत की केंद्रीय भूमिका स्थापित होती है।
  8. विविध और संतुलित विदेश नीतिः क्वाड से जुड़ने के बावजूद भारत के रूस, आसियान और अन्य समूहों के साथ रिश्ते मजबूत बने रहते हैं, जो भारत की बहु-संरेखित (Multi-aligned) विदेश नीति को दर्शाता है।

निष्कर्ष:

♦ क्वाड अब केवल बातें करने का मंच न रहकर ठोस कदम उठाने वाला एक व्यावहारिक समूह बन गया है। भविष्य में इसकी बैठकों को अधिक संस्थागत बनाना, स्पष्ट नीतियां रखना और बुनियादी ढांचे का विस्तार करना इसे और मजबूत करेगा। किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बने बिना क्वाड का सदस्य बने रहना भारत को हिंद-प्रशांत में अपने हित सुरक्षित करने की ताकत देता है।