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राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष: एक ऐतिहासिक मील का पत्थर

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·      राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष  पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर एक विशेष गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने विधानसभा के नए प्रतीक चिह्न (Emblem) का विमोचन किया और परिसर के 13 द्वारों (गेट्स) का नामकरण 18 मई, 2026 को किया गया।

·      "विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र मंदिर है।"  राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े

·      नए प्रतीक चिह्न (Emblem) की विशेषताएँ :

·       संवैधानिक गरिमा : इसमें सत्य, न्याय और विधायी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में अशोक स्तंभ और विधान भवन की छवि को दर्शाया गया है।

·       सांस्कृतिक प्रतीक : नए प्रतीक चिह्न में राजस्थान की संस्कृति के रंग दिखाई देते हैं, जो राज्य की विरासत के मूल तत्वों को संजोए हुए हैं।

·       इस प्रतीक चिन्ह में खेजड़ी वृक्ष, विधानसभा भवन, ऊंट तथा गोडावण (Great Indian Bustard) जैसे प्रतीकों को शामिल किया गया है। यह प्रतीक राजस्थान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उसकी सहनशीलता, पर्यावरणीय विरासत तथा सह-अस्तित्व की भावना का प्रतीक है।

द्वार (Gate) नया नाम उपयोग / महत्व
उत्तरी द्वार कर्तव्य द्वार महामहिम राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमत्री और नेता प्रतिपक्ष के प्रवेश के लिए।
दक्षिणी द्वार शक्ति द्वार आम जनता और आगंतुकों के प्रवेश के लिए मुख्य द्वार।
पश्चिमी द्वार सुशासन द्वार माननीय विधायकों (MLAs) के प्रवेश के लिए आरक्षित।
पूर्वी द्वार संकल्प द्वार राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रवेश के लिए।

·      मुख्य दिशाओं के आधार पर 5 प्रमुख द्वार -

1.    शौर्य द्वार (कर्तव्य द्वार) : उत्तरी द्वार यह विशिष्ट अतिथियों (राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष) के प्रवेश के लिए है। (इसे लोकतांत्रिक आदर्शों के तहत 'कर्तव्य द्वार' और राजस्थान की वीर परंपरा के तहत 'शौर्य द्वार' के भाव से जोड़ा गया है)

2.    शक्ति द्वार : दक्षिणी द्वार यह मुख्य रूप से आम जनता (लोकतंत्र की असली शक्ति) और आगंतुकों के प्रवेश के लिए तय किया गया है।

3.    सुशासन द्वार : पश्चिमी द्वार यह माननीय विधायकों (MLAs) के प्रवेश के लिए आरक्षित है, ताकि वे सुशासन का ध्येय लेकर सदन में प्रवेश करें।

4.    संकल्प द्वार : पूर्वी द्वार यह राजकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रवेश के लिए है, ताकि प्रशासन जनता की सेवा और राहत का संकल्प लेकर काम करे।

5.    सद्भावना द्वार : परिसर का एक अन्य आंतरिक/सहयोगी द्वार।

   राजस्थान के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक क्षेत्रों के नाम पर 8 बाहरी द्वार

  • राजस्थान की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने के लिए शेष द्वारों का नामकरण राज्य के प्रसिद्ध अंचलों के नाम पर किया गया है:

1.    मेवाड़ द्वार   (राष्ट्र गौरव और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक)

2.    मारवाड़ द्वार  (संघर्षशीलता और जीवंतता का प्रतीक)

3.    शेखावाटी द्वार  (कला, संस्कृति और वीर सपूतों की भूमि)

4.    हाड़ौती द्वार   (साहित्यिक और बेजोड़ स्थापत्य परंपरा का प्रतीक)

5.    ढूंढाड़ द्वार   (राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ऊर्जा का केंद्र)

6.    वागड़ द्वार   (प्राकृतिक सुंदरता और आदिवासी चेतना का प्रतीक)

7.    ब्रज द्वार     (धार्मिक सौहार्द, कला और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक)

8.    मेरवाड़ा द्वार   (संत परंपरा और ऐतिहासिक समन्वय का प्रतीक)