सेमीकॉन 2.0 अधिसूचित - भारत सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण (UPSC/RAS/PSI)
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समाचार में क्यों है?
योजना के परिचालन दिशा-निर्देश, पात्रता मानदंड, और प्रोत्साहन ढांचे को 15 जुलाई 2026 को मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के बाद, 31 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया गया।
उद्देश्य:
एक आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन एवं विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना, जो सभी क्षेत्रों में आर्थिक विकास का समर्थन करता है, आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता बढ़ाकर राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी नेतृत्व भी स्थापित करता है।
राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति 2019 (NPE 2019) का दृष्टिकोण भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन एवं विनिर्माण (ESDM) के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का है
मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
नोडल क्रियान्वयन एजेंसी: भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)।
वित्तीय परिव्यय: ₹1,27,500 करोड़।
घोषणा: वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में
कवरेज: योजना 10 श्रेणियों को कवर करने वाले छह स्तंभों के माध्यम से संचालित होगी।छह रणनीतिक वर्टिकल
चिप डिज़ाइन (स्टार्टअप/MSME सहित)
सिलिकॉन वेफर फैब्रिकेशन
कंपाउंड सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले फैब
उन्नत पैकेजिंग (OSAT/ATMP)
सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री
R&D/प्रतिभा विकास।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की सह-अध्यक्षता वाली एक उच्च-स्तरीय समिति महत्वपूर्ण अवसंरचना और राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु महत्वपूर्ण 100 से अधिक 'रणनीतिक चिप्स' के एक पोर्टफोलियो की पहचान करेगी।
सिलिकॉन वेफर फैब हेतु: पात्र पूँजीगत व्यय के 40% तक सरकारी समर्थन; आवेदकों को प्रति माह न्यूनतम 40,000 वेफर स्टार्ट की क्षमता और न्यूनतम ₹20,000 करोड़ के निवेश के साथ 300-मिमी सुविधा का प्रस्ताव देना होगा।
परियोजनाएँ आमतौर पर छह वर्षों तक चलेंगी, जिसमें प्रारंभिक तीन-वर्षीय आवेदन विंडो होगी।
लक्ष्य: प्रतिभा घटक के तहत अतिरिक्त एक लाख सेमीकंडक्टर इंजीनियरों का विकास।
पृष्ठभूमि
सेमीकॉन 1.0 (भारत सेमीकंडक्टर मिशन, दिसंबर 2021 में स्वीकृत) के एक सतत सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु ₹76,000 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ स्वीकृत किया गया था।
सेमीकॉन 1.0 के तहत गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, और आंध्र प्रदेश — छह राज्यों में ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक मूल्य की दस परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई
धोलेरा (गुजरात) में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स-PSMC फैब
सानंद (गुजरात) में CG पावर-रेनेसास-स्टार्स OSAT इकाई और माइक्रोन ATMP इकाई।
राजस्थान: वर्तमान में ISM चरण 1 के तहत एक स्वीकृत सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन या पैकेजिंग इकाई की मेज़बानी करने वाले राज्यों में शामिल नहीं है
महत्व
आर्थिक: वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को गहरा करता है; भारत के सेमीकंडक्टर बाज़ार के 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
रणनीतिक: PSA-NSA सह-अध्यक्षता वाली समिति चिप नीति को स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण-अवसंरचना लचीलेपन से जोड़ती है।
समावेशी डिज़ाइन: चिप डिज़ाइन में स्टार्टअप और MSME तक पात्रता का विस्तार सेमीकॉन 2.0 को सेमीकॉन 1.0 के फैब-केंद्रित फोकस से अलग करता है।
रोज़गार एवं कौशल विकास: एक उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में मानव-पूँजी विकास से प्रत्यक्ष संबंध।
चुनौतियाँ / चिंताएँ
सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन अत्यधिक पूँजी- और प्रौद्योगिकी-गहन है; भारत उन्नत नोड्स हेतु अभी भी विदेशी लाइसेंस प्राप्त प्रौद्योगिकी और उपकरणों पर निर्भर है।
समय का भारी निवेश तथा प्रौद्योगिकी साझेदारों के समान पूल हेतु उच्च वैश्विक प्रतिस्पर्धा (अमेरिका, ताइवान, दक्षिण कोरिया, चीन, और EU से)।
वास्तविक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण बनाम केवल असेंबली/पैकेजिंग मूल्य वर्धन सुनिश्चित करना एक नीतिगत चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह
केवल OSAT/ATMP क्षमता के बजाय उन्नत नोड्स पर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण हेतु वैश्विक फैब के साथ सहयोग को गहरा करना।
एक-लाख-इंजीनियर लक्ष्य को यथार्थवादी समय-सीमा के भीतर पूरा करने हेतु IIT, IISc, और उद्योग साझेदारियों के माध्यम से समन्वित कौशल विकास।
प्रारंभिक परीक्षा
योजना
सेमीकॉन 2.0 (सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम, चरण 2)
मंत्रालय / नोडल एजेंसी
MeitY / भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)
मंत्रिमंडल की मंज़ूरी
15 जुलाई 2026
परिव्यय
₹1,27,500 करोड़
सेमीकॉन 1.0 परिव्यय (2021)
₹76,000 करोड़
निगरानी समिति
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की सह-अध्यक्षता में