Answer:-
भूमिका
- ब्रिटिश काल में रियासती प्रतिबंधों के बावजूद पत्र-पत्रिकाएँ राजस्थान में राजनीतिक चेतना, सामाजिक सुधार तथा राष्ट्रीय एकता की प्रमुख वाहक बनीं।
1. राजनीतिक जागरण:-
- राजस्थान केसरी (1920) (विजयसिंह पथिक) ने बिजौलिया किसान आंदोलन व रियासती दमन को उजागर किया।
- नवीन राजस्थान (राजस्थान सेवा संघ का मुखपत्र) पर प्रतिबंध के बाद तरुण राजस्थान प्रकाशित हुआ; दोनों ने प्रजामंडल व किसान आंदोलनों को स्वर दिया।
- राजपूताना हेराल्ड तथा राजस्थान समाचार ने उत्तरदायी शासन और ब्रिटिश-रियासती नीतियों की आलोचना की।
2. सामाजिक सुधार एवं महिला सशक्तिकरण:-
- आर्य मार्तण्ड ने विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहन दिया।
- त्यागभूमि ने आधी दुनिया स्तम्भ से महिला जागरण तथा गांधीवादी विचारों का प्रचार किया।
- राजपूताना गजट से जुड़ी मोती बेगम प्रारम्भिक महिला पत्रकार थीं।
3. राजस्थान का एकीकरण:-
- लोकवाणी, प्रजा सेवक एवं रियासत ने प्रजामंडल आंदोलनों, लोकतांत्रिक अधिकारों तथा भारत में विलय के पक्ष में जनमत बनाया।
4. राष्ट्रीय आंदोलन से एकीकरण:-
- राजस्थान केसरी, तरुण राजस्थान, नवज्योति आदि ने स्वदेशी, असहयोग एवं किसान आंदोलनों को राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।
निष्कर्ष:
- इन पत्र-पत्रिकाओं के संपादक—विजयसिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, हरिभाऊ उपाध्याय, कनक मधुकर आदि—स्वयं जनआंदोलनों के अग्रणी नेता थे। इसलिए राजस्थान में पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि जन-जागरण और स्वतंत्रता संघर्ष का सशक्त औजार थी।