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चर्चा में क्यों? 2 जुलाई 2026 को नीति आयोग ने प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (PwC) के सहयोग से "स्ट्रेटेजिक रोडमैप फॉर मेकिंग आयुर्वेद ग्लोबल" नामक एक रिपोर्ट जारी की है।
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मुख्य उद्देश्य: आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर एक साक्ष्य-आधारित, मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के रूप में स्थापित करने के लिए एक चरणबद्ध रणनीति (2047 तक) प्रस्तुत करना है।
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रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: आयुर्वेद के वैश्वीकरण की तीन-स्तंभीय रूपरेखा
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उपलब्धता (Availability): वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्यबल तैयार करना, निर्यात और विनिर्माण को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर R&D (अनुसंधान एवं विकास) करना और आयुर्वेद शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना ।
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स्वीकार्यता (Acceptability): अंतरराष्ट्रीय नियमों और दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करना, शैक्षणिक व औद्योगिक सहयोग बढ़ाना, बीमा कवरेज प्राप्त करना और आयुर्वेद को स्थानीय सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुकूल बनाना।
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प्रसार (Spread/Awareness): रणनीतिक ब्रांडिंग, 'चिकित्सा मूल्य पर्यटन' को बढ़ावा देना और वैश्विक संस्थाओं (जैसे WHO) में आयुर्वेद की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करना।
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रणनीतिक और आर्थिक महत्व:
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यह पहल भारत को पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करेगी।
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यह रोजगार सृजन और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान-आधारित 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) को भी मजबूती देगी।
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यह भारत की "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य" (One Earth, One Health) की व्यापक प्रतिबद्धता और "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के मूल दर्शन को विश्व पटल पर साकार करती है
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WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (GCTM): भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से जामनगर (गुजरात) में GCTM की स्थापना की गई है। यह दुनिया का पहला और एकमात्र आउटपोस्टेड वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र है।