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➔ स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय- बीकानेर (RAS/PSI)

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  • आयोजन: बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय का 40वाँ स्थापना दिवस समारोह और डॉ. के. एन. नाग स्मृति व्याख्यानमाला (1 अगस्त 2026)
  • मुख्य अतिथि: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे एवं केंद्रीय विधि तथा न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल।
  • कृषि पर आधारित एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस-
  • भारत सरकार के 'इंडिया एआई मिशन' द्वारा इंडस्ट्री 4.0 के तहत विश्वविद्यालय को स्वीकृति।
  • स्वीकृत वित्तीय राशि: ₹20 करोड़।

  • ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र: DGCA, नई दिल्ली द्वारा अधिकृत तथा ' स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन' द्वारा संचालित केंद्र का लोकार्पण।
  • मानद उपाधि: राज्यपाल द्वारा केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल को विश्वविद्यालय की सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि 'डॉक्टर ऑफ साइंस' (D.Sc.) प्रदान की गई।    
  • विमोचित पुस्तकें-
  • 'परिवर्तन, प्रगति और प्रतिबद्धता'
  • 'एन इंट्रोडक्शन टू एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन, फंक्शंस एंड लीनियर प्रोग्राम'
  • राज्यपाल द्वारा-विख्यात शिक्षाविद् सुधामूर्ति, जैव रसायनज्ञ कमला भागवत सहोनी, स्वामी केशवानंद के योगदान का स्मरण।
  • डॉ. के. एन. नाग:  स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व कुलपति एवं कृषि अभियांत्रिकी (Agricultural Engineering) के प्रख्यात शिक्षाविद व वैज्ञानिक थे।
  • सुधामूर्ति: शिक्षाविद्, लेखिका, समाज सेविका तथा इन्फोसिस फाउंडेशन की पूर्व अध्यक्ष।उन्होंने भारत में शिक्षा, पुस्तकालय क्रांति, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया है। वे राज्यसभा सांसद भी है।
  • कमला भागवत सहोनी: भारत की पहली महिला जैव रसायनज्ञ और प्रसिद्ध वैज्ञानिक। वे नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. सी.वी. रमन के तहत शोध करने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और पौधों व खाद्य पदार्थों (विशेष रूप से धान की भूसी और ताड़ के रस/नीरा) में प्रोटीन व विटामिनों के पोषण मूल्यों पर महत्वपूर्ण शोध किया, जिससे कुपोषण से निपटने में मदद मिली।
  • स्वामी केशवानंद: महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, जिनके नाम पर बीकानेर के कृषि विश्वविद्यालय का नामकरण किया गया है। उन्होंने राजस्थान के मरुस्थलीय एवं ग्रामीण अंचलों (विशेषकर बीकानेर, संगरिया और श्रीगंगानगर) में शिक्षा की अलख जगाने के लिए लगभग 300 से अधिक ग्रामीण विद्यालयों और पुस्तकालयों की स्थापना की। उन्हें 'मरुभूमि का शिक्षा संत' कहा जाता है।

Source: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान सरकार।