उत्तर:
- इसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा संविधान में शामिल किया गया, जिसका उद्देश्य 'आया राम, गया राम' की राजनीति को समाप्त कर राजनीतिक स्थिरता लाना है।
मुख्य प्रावधान :
अयोग्यता के आधार :
- संसदीय/विधानसभा सदस्य: स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता त्यागने या पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर मतदान करने/अनुपस्थित रहने पर।
- निर्दलीय सदस्य: चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होने पर।
- मनोनीत सदस्य: पद ग्रहण करने के 6 माह बाद किसी दल में शामिल होने पर।
- अपवाद: यदि किसी दल के कम से कम 2/3 सदस्य किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो अयोग्यता लागू नहीं होती
- निर्णायक प्राधिकरण: सदन के अध्यक्ष/सभापति को अयोग्यता पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार है (किहोतो होलोहन केस, 1992 के अनुसार यह निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन है)।
महत्व (Significance)
- राजनीतिक स्थिरता: सरकारों को असंवैधानिक या अनैतिक तरीकों से गिराने पर रोक लगाई।
- जनादेश का सम्मान: मतदाताओं द्वारा पार्टी के चुनाव चिह्न पर दिए गए वोट का सम्मान सुनिश्चित किया।
- पार्टी अनुशासन: राजनीतिक दलों में अनुशासन और व्हिप का पालन सुनिश्चित किया।
- भ्रष्टाचार पर अंकुश: अवसरवादी दल-बदल और 'हॉर्स-ट्रेडिंग' (खरीद-फरोख्त) की प्रवृत्ति पर लगाम लगाई।