उत्तर:
- राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) नीति आयोग द्वारा जारी किया जाने वाला एक समग्र मापदंड है, जो केवल मौद्रिक आय के आधार पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के विभिन्न आयामों में अभावों को मापता है। यह ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव (OPHI) और यूएनडीपी (UNDP) की कार्यप्रणाली पर आधारित है। भारत के सूचकांक में 3 मुख्य आयामों (स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर) के तहत 12 संकेतकों (जैसे पोषण, बाल मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता, बैंक खाते आदि) का प्रयोग किया जाता है।
भारत में बहुआयामी गरीबी का वर्तमान आकलन (आंकड़े एवं स्थिति)के अनुसार भारत में गरीबी के आंकड़े निम्नलिखित हैं:
- गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट: वर्ष 2015-16 में बहुआयामी गरीबी 24.85% थी, जो 2019-21 में घटकर 14.96% हो गई। नीति आयोग के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2013-14 के 29.17% की तुलना में 2022-23 में भारत में बहुआयामी गरीबी घटकर मात्र 11.28% रह गई है।
- गरीबी से मुक्ति: पिछले 9 वर्षों (2013-14 से 2022-23) में लगभग 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं।
- ग्रामीण बनाम शहरी: गरीबी में कमी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक तेजी से हुई है। 2019-21 के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 19.28% है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5.27% है।
- राज्यों की स्थिति: सबसे कम गरीबी केरल (0.55%) में है, जबकि सर्वाधिक गरीबी का अनुपात बिहार (33.76%) में है। हालांकि, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश ने गरीबी से बाहर निकलने वाले लोगों की संख्या में सबसे बड़ी और तेज गिरावट दर्ज की है।
बहुआयामी गरीबी में हालिया गिरावट के प्रमुख उत्तरदायी कारण-
नीति आयोग के अनुसार सूचकांक के सभी 12 संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस गिरावट के लिए सरकार की लक्षित योजनाएं (Flagship Schemes) और समग्र दृष्टिकोण मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं
- स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार: 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत बड़े पैमाने पर शौचालय निर्माण से स्वच्छता के अभाव में सबसे अधिक गिरावट (21.8 प्रतिशत अंक) दर्ज की गई है।
- स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता: 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) के तहत महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने से खाना पकाने के ईंधन के अभाव में 14.6 प्रतिशत अंक की भारी कमी आई है।
- पोषण और स्वास्थ्य में सुधार: 'पोषण अभियान' (Poshan Abhiyan) और 'एनीमिया मुक्त भारत' ने स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाई है, जिससे मातृ स्वास्थ्य और शिशु मृत्यु दर के संकेतकों में सुधार हुआ है।
- जल और विद्युतीकरण: 'जल जीवन मिशन' के तहत हर घर नल से जल और 'सौभाग्य योजना' के माध्यम से विद्युतीकरण ने ग्रामीण जीवन स्तर के आयाम में व्यापक बदलाव किया है।
- वित्तीय समावेशन और आवास: 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना' (PMJDY) ने लगभग हर परिवार को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है, जबकि 'पीएम आवास योजना' (PMAY) ने वंचितों को पक्के मकान उपलब्ध कराए हैं।
- खाद्य सुरक्षा: "राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम" (NFSA) और 'पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना' (PMGKAY) के तहत 81 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त अनाज वितरण ने पोषण को सुनिश्चित किया है।
निष्कर्षतः
- नीति आयोग के नवीनतम आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत बहुआयामी गरीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के एकीकृत हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप, भारत वर्ष 2030 से काफी पहले गरीबी को कम से कम आधा करने के अपने सतत विकास लक्ष्य (SDG 1.2) को प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। यह केवल आय आधारित गरीबी में कमी नहीं है, बल्कि यह मानव विकास और समावेशी विकास (Inclusive Growth) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।