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अमेरिका/इजराइल-ईरान युद्ध

  • अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी, 2026 को ईरान के विरूद्ध संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया।

  • युद्ध के 4 उद्देश्य (ट्रम्प द्वारा 28 फरवरी के भाषण में बताए गए) -

    1. सत्ता परिवर्तन

    2. ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना

    3. ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकना

    4. यह सुनिश्चित करना कि वह सहयोगी सशस्त्र समूहों (हमास, हिजबुल्लाह, हूती आदि) को अपना समर्थन जारी न रख सके।

  • यद्यपि समय के साथ इस युद्ध के उद्देश्य में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है।

 

देश ऑपरेशन का नाम उद्देश्य
अमेरिका ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

प्रारंभ तिथिः 28 फरवरी, 2026।

लक्ष्यः ईरान के मिसाइल / परमाणु अवसंरचना और सुरक्षा तंत्र को नष्ट करना।

इजराइल ऑपरेशन लॉयन्स रोर तेहरान और परमाणु स्थलों पर पूर्व नियोजित हमले (एपिक फ्यूरी के साथ समन्वित)।
ईरान ऑपरेशन प्रॉमिस 4 ईरान द्वारा इजराइल और अमेरिकी क्षेत्रीय ठिकानों पर जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले।
अमेरिका (वेनेजुएला) ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व (3 जनवरी, 2026) राष्ट्रपति मादुरो की गिरफ्तारी एवं 'सत्ता परिवर्तन'

 

चर्चित स्थान

  • ईरान
    • खार्ग द्वीपः यह ईरान के लगभग 90% तेल निर्यात का केंद्र है।

    • मीनाब : ईरान के इस क्षेत्र में एक स्कूल पर हवाई हमला हुआ, जिसमें 168 स्कूली बच्चे मारे गए।

    • होर्मुज जलसंधि

      • होर्मुज जलसंधि से भारत की 85% एलपीजी और 55% एलएनजी का परिवहन होता है।

      • भारत अपनी कच्चे तेल का लगभग 88% आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।

    • नतान्जः ईरान में परमाणु अनुसंधान केंद्र, हाल ही में हमला हुआ।

  • संयुक्त अरब अमीरातः फुजैरा बंदरगाह, हबशान गैस क्षेत्र, शाह गैस क्षेत्र।

  • कतरः रास लाफान औद्योगिक शहर।

  • इजराइलः नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र,डिमोना।

  • कुवैतः मीना अल अहमदी।

  • साउथ पार्स/नॉर्थ डोम गैस क्षेत्रः दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र और ईरान (साउथ पार्स) और कतर (नॉर्थ डोम) के बीच साझा है।

 

IRIS देना (Dena)

  • इस युद्धपोत (फ्रिगेट) को यूएसएस शेर्लोट (अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी) ने टॉरपीडो से निशाना बनाया।

  • यह जहाज श्रीलंका के उत्तरदायित्व वाले खोज एवं बचाव क्षेत्र में गाले से 20 समुद्री मील पश्चिम में संचालित हो रहा था।

  • भारतीय नौसेना ने तुरंत आईएनएस तरंगिनी के नेतृत्व में खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया।

  • मिलान अभ्यास में भाग लिया।

 

प्रमुख वैश्विक तेल मानक

  • ब्रेंट क्रूड ऑयल

    • उत्पत्तिः उत्तरी सागर के तेल क्षेत्र

    • सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला वैश्विक मानक

    • उपयोगः यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व को निर्यात; समुद्री मार्ग से तेल व्यापार का मूल्य निर्धारण।

  • वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट

    • उत्तरी अमेरिका और अंतर्देशीय क्षेत्रों के लिए मानक (पाइपलाइन आधारित)

  • दुबई/ओमान क्रूड मानक

    • मुख्य रूप से मध्य पूर्व से एशियाई बाजारों में निर्यात के लिए उपयोग किया जाता है।

 

ईरानः नेतृत्व परिवर्तन और महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ

  • 28 फरवरी को सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद एक बदलाव आया है:

पद व्यक्ति
दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई
अंतरिम सर्वोच्च नेता अलीरेजा अराफी
नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन
विदेश मंत्री अब्बास अराघची
सुरक्षा परिषद के दिवंगत सचिव अली लारीजानी
नए सुरक्षा परिषद् सचिव मोहम्मद बागेर जोलघदर

 

इस्तेमाल की गई मिसाइलें

  • ईरान - क्लस्टर बम मिसाइल (खोर्रमशहर-4), शाहब-3, फतेह सीरीज, कादर क्रूज मिसाइलें, फत्ताह 2 (हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल)।

  • इजराइल - जेरिको मिसाइलें, एरो-3 (इंटरसेप्टर)।

  • अमेरिका - टोमाहॉक लैंड अटैक मिसाइल, पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, थाड (THAAD)।

 

युद्ध संबंधी कानून

ढांचा मुख्य प्रावधान उद्देश्य
संयुक्त राष्ट्र चार्टर
  • प्रस्तावनाः भविष्य की पीढ़ियों को युद्ध की 'विषमताओं' से बचाना और अंतरराष्ट्रीय शांति / रक्षा बनाए रखना।
  • अनुच्छेद 2(4): राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल के प्रयोग या धमकी पर रोक।
  • केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद शांति भंग पर बल प्रयोग की अनुमति दे सकती है।
  • अनुच्छेद 51: केवल वास्तविक सशस्त्र हमले के बाद आत्मरक्षा की अनुमति।
युद्ध का अधिकार (jus ad bellum) को नियंत्रित करता है; कब बल प्रयोग हो सकता है, इसकी पाबंदी।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL)
  • जेनेवा संधियाँ (1949): घायल / बीमार, युद्धबंदियों, नागरिकों की सुरक्षा।
  • क्रूर हथियारों / युद्ध पद्धतियों पर प्रतिबंध।
  • शत्रुता के आचरण को नियंत्रित करता है।
युद्ध में (jus in bello) को नियंत्रित करता है; युद्ध की वैधता से परे मानवीय आचरण सुनिश्चित करना
रोम स्टेट्यूट (ICC)
  • नागरिकों का जानबूझकर निशाना बनाना और शिक्षा भवनों पर हमले को युद्ध अपराध घोषित।
युद्ध के दौरान उल्लंघनों को अपराध बनाता है; jus in bello उल्लंघनों के लिए मुकदमा।
UNCLOS
  • यह मुख्य रूप से शांतिकाल के दौरान समुद्री आचरण को नियंत्रित करता है, किन्तु सशस्त्र संघर्ष के दौरान नौसैनिक युद्ध का विनियमन नहीं करता है।

अप्रत्याशित घटना (फोर्स मेज्योर) के बारे में

  • चर्चा में क्यों?: ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध के मद्देनजर, कतर, बहरीन और कुवैत सहित खाड़ी देशों ने गैस निर्यात पर अप्रत्याशित घटना (फोर्स मेज्योर) की घोषणा की है।

  • अप्रत्याशित घटना (फोर्स मेज्योर) का प्रावधान एक सुरक्षात्मक कानूनी कवच के रूप में कार्य करता है, जो प्राकृतिक आपदाओं जैसी विनाशकारी घटनाओं के दौरान, जो अनुबंधित पक्षों के उचित नियंत्रण से परे होती हैं, प्रदर्शन दायित्वों को निलंबित कर देता है।

पश्चिम एशिया युद्ध से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • आधिकारिक रुखः संवाद, कूटनीति और तनाव कम करने के लिए दृढ़ समर्थन। नागरिकों, ऊर्जा/परिवहन अवसंरचना पर हमलों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों (होर्मुज जलसंधि) में अवरोध की निंदा।

  • घरेलू सतर्कताः तटीय सीमा, साइबर और रणनीतिक क्षेत्रों में उच्च सतर्कता। संकट के दुरुपयोग, कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए राज्यों को सख्त निर्देश जारी किए गए।

  • भारत ने अर्मेनिया के रास्ते ईरान से अपने 550 से अधिक नागरिकों को निकाला है।

  • अंतर-मंत्रालयी समूह (Inter-Ministerial Group): संकट की स्थिति में समन्वित 'सम्पूर्ण सरकार दृष्टिकोण' के तहत आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पर IMG का 02 मार्च, 2026 को गठन किया गया है, जो स्थिति की निगरानी एवं आवश्यक सुगमीकरण उपायों का समन्वय करेगा।

  • सशक्त समितियों का गठन: पश्चिम एशिया संकट के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने हेतु भारत सरकार ने 7 सशक्त समितियों (Empowered Committees) का गठन किया है।
  • उत्पाद शुल्क में कमी: पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क में रु. 10 प्रति लीटर की कटौती की गई है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जा सके।
  • निर्यात शुल्क का आरोपण: घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु डीजल पर रु. 21.5 प्रति लीटर तथा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर रु. 29.5 प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया है।
  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने पिछले 11 वर्षों में अपने आयात का दायरा 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक करके अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाई है।

प्राकृतिक गैस एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति

  • खपत एवं उत्पादन: भारत में प्राकृतिक गैस की कुल खपत लगभग 189 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रतिदिन है, जिसमें से लगभग 97.5 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रतिदिन घरेलू उत्पादन से प्राप्त होता है। अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण लगभग 47.4 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रतिदिन की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

  • आपूर्ति स्थिति को नियंत्रित करने हेतु केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act के तहत 9 मार्च, 2026 को Natural Gas Control Order जारी किया है।

    • उद्देश्य: एलपीजी एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को विनियमित करना, न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना तथा जमाखोरी को रोकना।

    • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की भूमिका: आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की आपूर्ति की निगरानी एवं विनियमन में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की प्रमुख भूमिका निर्धारित की गई है।

प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026

  • विधिक आधार: प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम उत्पादों का वितरण (पाइपलाइनों एवं अन्य सुविधाओं का बिछाने, निर्माण, संचालन एवं विस्तार) आदेश, 2026- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत जारी।

  • यह आदेश पाइपलाइन विस्तार हेतु एक समयबद्ध एवं सरलीकृत ढांचा स्थापित करता है, जिसके माध्यम से भूमि अधिग्रहण/पहुँच तथा नियामकीय बाधाओं का समाधान किया जाता है।

  • मुख्य उद्देश्य:

    • PNG विस्तार में तेजी: आवासीय क्षेत्रों में अंतिम छोर (last-mile) तक पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की पहुँच बढ़ाना।

    • ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा: स्वच्छ ईंधनों की ओर संक्रमण को प्रोत्साहित कर ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना।

    • आर्थिक प्रभाव: तीव्र अवसंरचना विकास के माध्यम से भारत को गैस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करना।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955)

  • उद्देश्य: यह अधिनियम उन वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण को नियंत्रित करने हेतु अधिनियमित किया गया है, जिन्हें आम जनता के लिए आवश्यक माना गया है।

  • मुख्य प्रावधान: यह सरकार को जमाखोरी एवं कालाबाजारी को रोकने तथा आवश्यक वस्तुओं का न्यायसंगत वितरण उचित मूल्य पर सुनिश्चित करने के लिए सशक्त बनाता है।

पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (Port of Refuge)

  • Adani Ports and Special Economic Zone Ltd द्वारा दिघी पोर्ट (मुंबई) और गोपालपुर पोर्ट (ओडिशा) में भारत के प्रथम 'पोर्ट ऑफ रिफ्यूज' (POR) की स्थापना की गई है।

  • पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (POR): यह एक निर्दिष्ट सुरक्षित स्थान होता है, जहाँ आग, टक्कर अथवा यांत्रिक विफलता जैसी परिस्थितियों में संकटग्रस्त जहाज शरण ले सकते हैं। इसका उद्देश्य पोत को स्थिर करना, मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा पर्यावरणीय क्षति को न्यूनतम करना है।

कच्चा तेल

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR):

  • SPR में 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल है।

  • विस्तारः क्षमता में अतिरिक्त 6.5 मिलियन मीट्रिक टन की वृद्धि।

    • चरण-I SPR स्थान (5.33 मिलियन मीट्रिक टन): वर्तमान में तीन स्थानों पर कार्यरत हैं:

      • मंगलौर (कर्नाटक)

      • विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश)

      • पादुर (कर्नाटक)

    • चरण-II (2021 में स्वीकृत, अतिरिक्त 6.5 मिलियन मीट्रिक टन के साथ) भविष्य में विस्तार की योजना निम्नलिखित स्थानों पर है:

      • चांदीखोल (ओडिशा)

      • पादुर चरण-II

  • टिप्पणी- बफरः तेल विपणन कंपनियां स्वतंत्र वाणिज्यिक भंडार बनाए रखती हैं।

ऑपरेशन संकल्प

  • चर्चा में क्यों?: भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक पोतों शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी को ओमान की खाड़ी से सुरक्षित निकाला।

  • शुरूआतः 19 जून 2019

  • उद्देश्यः भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और भारतीय नौसेना द्वारा भारत के समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की रक्षा करना।

ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा

  • ऊर्जा सुरक्षा अभियान भारतीय नौसेना द्वारा 25 मार्च 2026 को शुरू किया गया एक रणनीतिक नौसैनिक अभियान है।

  • उद्देश्यः संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मालवाहक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना।

  • इस अभियान के तहत, विध्वंसक और फ्रिगेट सहित पांच से अधिक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों को ओमान की खाड़ी में तैनात किया गया है।

 

रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (RELIEF) योजना

  • लॉन्चः वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा निर्यात संवर्धन मिशन (EPM) के अंतर्गत।

  • उद्देश्यः खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में व्यवधानों के कारण माल ढुलाई शुल्क में असाधारण वृद्धि, बीमा प्रीमियम में वृद्धि और युद्ध संबंधी निर्यात जोखिमों से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रदान करना।

  • वित्तीय परिव्ययः रु. 497 करोड़।

  • लॉन्च दिनांक: 19 मार्च, 2026

  • नोडल कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम लिमिटेड (ECGC)।

  • कवरेजः RELIEF योजना में पात्र पूर्व शिपमेंट और भावी निर्यात दोनों शामिल हैं, जिसमें MSME सहायता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

  • यह हस्तक्षेप EPM के अंतर्गत वित्त पोषित होगा और राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी।

मुख्य विशेषताएं:

  • पात्र अवधि (14 फरवरी, 2026 से 15 मार्च, 2026) के दौरान बीमित खेपों के लिए 100% तक अतिरिक्त जोखिम कवरेज

  • अगले तीन महीनों (16 मार्च, 2026 से 15 जून, 2026) के दौरान आगामी खेप भेजने की योजना बना रहे निर्यातकों के लिए 95% तक सहायता

  • पात्र गैर-ECGC-बीमित MSME निर्यातकों के लिए 50% तक प्रतिपूर्ति (अधिकतम सीमा रु. 50 लाख)।

निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM)

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 12 नवंबर, 2025 को अनुमोदित।

  • घोषणाः केंद्रीय बजट 2025-26।

  • कार्यान्वयन अवधिः FY 2025-26 से 2030-31।

  • कुल परिव्ययः रु. 25,060 करोड़।

  • उद्देश्यः भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME), पहली बार निर्यात करने वालों और श्रम प्रधान क्षेत्रों के लिए।