उत्तर:
- संविधानविद ग्रैनविल ऑस्टिन ने अपनी पुस्तक में संविधान सभा को "सूक्ष्म जगत का भारत" (Microcosm of India) कहा था। इसका अर्थ है कि संविधान सभा भारत की जनसांख्यिकीय, सामाजिक, वैचारिक और भाषाई विविधता का एक यथार्थवादी लघु रूप थी।
'सूक्ष्म जगत का भारत' सिद्ध करने वाले प्रमुख आयाम एवं उदाहरण:
1. सामाजिक एवं धार्मिक विविधता:
- हिंदू, मुस्लिम, सिख, पारसी, ईसाई, एंग्लो-इंडियन और आदिवासी वर्गों का प्रतिनिधित्व।
- उदाहरण: पारसी समुदाय से एच.पी. मोदी, एंग्लो-इंडियन समुदाय से फ्रैंक एंथनी, और ईसाई समुदाय से एच.सी. मुखर्जी (जो सभा के उपाध्यक्ष भी थे)।
2. जनजातीय एवं वंचित वर्गों की आवाज़:
- संरचना: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों की मुखर अभिव्यक्ति।
- उदाहरण: छोटानागपुर क्षेत्र के आदिवासी हितों के लिए जयपाल सिंह मुंडा का ऐतिहासिक वक्तव्य और दलित अधिकारों व सामाजिक न्याय के लिए डॉ. बी.आर. आंबेडकर व बाबू जगजीवन राम का योगदान।
3. लैंगिक विविधता :
- संरचना: तत्कालीन रूढ़िवादी दौर के बावजूद 15 महिला सदस्यों की सक्रिय उपस्थिति।
- उदाहरण: बेगम ऐज़ाज़ रसूल (एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य), राजकुमारी अमृत कौर (स्वास्थ्य), हंसा मेहता (महिला अधिकारों की चार्टर प्रस्तुति), और अम्मु स्वामीनाथन।
4. वैचारिक और राजनीतिक बहुलवाद :
- संरचना: कांग्रेस के बहुमत के बावजूद दक्षिणपंथी, वामपंथी, गांधीवादी, और समाजवादियों का समावेश।
- उदाहरण: गांधीवादी आर्थिक मॉडल के पक्षधर श्रीमन्नारायण अग्रवाल, वामपंथी/समाजवादी रुझान वाले के.टी. शाह, और हिंदू राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी।
5. भौगोलिक एवं प्रांतीय विविधता :
- संरचना: ब्रिटिश प्रांतों से लेकर सुदूर देसी रियासतों का प्रतिनिधित्व।
- उदाहरण: पूर्वोत्तर से गोपीनाथ बोरदोलोई, दक्षिण से अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, और रियासतों के एकीकरण के संदर्भ में वी.टी. कृष्णमाचारी।
6. व्यावसायिक और विषयगत विशेषज्ञता :
- संरचना: केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि न्यायविद, शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता।
- उदाहरण: कानूनविद् बी.एन. राव (संवैधानिक सलाहकार), अर्थशास्त्री के.टी. शाह, और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन।
⇒ हालांकि भले ही चुनाव अप्रत्यक्ष (1935 के एक्ट के तहत प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा) हुआ था, लेकिन इसमें सहमति और समायोजन का सिद्धांत लागू था, जिसने किसी भी वर्ग को उपेक्षित नहीं होने दिया।
♦ अतः संविधान सभा केवल जनसांख्यिकीय रूप से ही नहीं, बल्कि "विचारों और आकांक्षाओं" के स्तर पर भी भारत का सूक्ष्म रूप थी। इसने विविधता में एकता के भारतीय दर्शन को मूर्त रूप दिया, यही कारण है कि भारतीय संविधान पिछले सात दशकों से एक जीवंत दस्तावेज के रूप में भारत को एकजुट रखे हुए हैं।